• Wed. Jun 3rd, 2026

वर्णना: भूषण, पूर्वी बंगाल के शरणार्थी, कलकत्ता की गलियों में अपने आप की तलाश में भटकते हुए

Byadmin

Jun 3, 2026 #source
Fiction: Bhushan, a refugee from East Bengal, wanders about Calcutta’s streets searching for himself

भूषण का खोया हुआ अतीत: एक पूर्वी बंगाल शरणार्थी की कहानी

1964 में अपने पुराने हवेली को मात देकर वशिष्ठ ने साथ永久诀विदा कहा था। यह उनके जीवन का सबसे दर्दनाक क्षण था, जब वह अपनी माता के साथ उस जगह को छोड़कर कभी वापस न लौटने के लिए निकल पड़े। लेकिन उनके लिए असली संकट तब शुरू हुआ जब वे कलकत्ता के धाका पट्टी में अपने भाइयों के किराए के कमरे में पहुंचे। उनके भाइयों ने उन पर शक किया कि उन्होंने अपनी माता के सामान में रखी एक बड़ी और भारी चांदी की थाली चुराई है और उसे नगदी के लिए गिरवी रख दिया है।

वास्तव में, कुश्तिया रेलवे स्टेशन की भीड़-भाड़ और अफरातफरी में हुई घटनाओं का उन्हें याद भी साफ़ नहीं था। वह निश्चिंत नहीं थे कि थाली रेलवे लाइन किन्हीं जगह छूट गई या सीमा पार करने वाले अधिकारियों में से किसी ने उसे अपनी नज़र में छुपा लिया। वह अगले दिन ही सेआलदह रेलवे स्टेशन वापस गए, उम्मीद जताते हुए कि शायद थाली मिल जाए, लेकिन वह कहीं गुम हो गई थी, जैसे हवा में रूड़ हो गई हो।

भाई ने अचानक बोलना बंद कर दिया और सोच में डूब गए। भूषण समझ सकते थे कि उनके मन में क्या चल रहा था। वे गुमशुदा चांदी के बर्तनों की चिंता में डूबे हुए थे, जो उनके लिए सिर्फ सामान नहीं, बल्कि परिवार की विस्थापन की कहानी थी। भले ही भूषण खुद को दोषी महसूस कर रहे थे, उनकी मानसिक स्थिति और उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां जटिल हो गईं।

यह कहानी केवल एक वस्तु के खोने की नहीं है, बल्कि विस्थापन और पहचान की भी है। भूषण जैसे कई पूर्वी बंगाल से पलायन करने वाले लोग, जिन्हें नए शहरों में अपनी जगह बनानी होती है, अतीत और वर्तमान के बीच संघर्ष करते रहते हैं।

भूषण की यह जीवन गाथा हमें श्रम, संघर्ष और अपने अस्तित्व की खोज की गहराईं में लेकर जाती है, जो एक शरणार्थी के मनोविज्ञान को समझने के लिए आवश्यक है। उनका सफर आज भी जारी है, जिसमें वे खुद को खोजने की जटिल प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

Source

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)