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ग़ाज़ियाबाद: बीएस-4) ट्रकों और बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध

शहर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक अक्तूबर 2026 से यूरो-4 (बीएस-4) ट्रकों और बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर ट्रांसपोर्टरों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि इस निर्णय का सबसे अधिक असर छोटे ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा, जिनकी आजीविका कुछ गाड़ियों पर ही निर्भर है।संभागीय परिवहन विभाग के आकड़ों के अनुसार शहर में करीब 50 हजार से अधिक ट्रक और बसें प्रभावित होंगी। केंद्र सरकार ने पुराने वाहनों को हटाकर नए वाहन खरीदने पर पंजीकरण शुल्क माफ करने और 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में छूट देने की घोषणा की है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि यह राहत पर्याप्त नहीं है। टूरिस्ट बस टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष संदीप त्यागी ने बताया कि वर्ष 2022 तक खरीदे गए कई बीएस-4 वाहनों का लोन अभी भी चल रहा है।वहीं, ट्रकों और बसों की कीमतें पिछले वर्षों में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। ऐसे में पुराने वाहन बेचने पर उचित मूल्य नहीं मिलेगा और नए वाहन खरीदना छोटे कारोबारियों के लिए मुश्किल होगा। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर सड़कों और उन्नत टायरों के कारण मौजूदा बीएस-4 वाहन अभी कई वर्षों तक उपयोग योग्य हैं।

बड़े ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों को दूसरे राज्यों में संचालित कर सकते हैं, लेकिन सीमित संख्या में वाहन रखने वाले छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।आरटीओ प्रशासन प्रमोद सिंह ने बताया कि बीएस-4 के वाहनों को लेकर कोई आदेश नहीं मिला है। बीएस-2 और बीएस-3 के वाहनों पर संभागीय परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से वाहनों को चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )