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एआई से पहले अरब और फ़ारसी पाक कविताओं में थे ‘खाद्य नाटक’

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Jun 21, 2026 #source
Long before AI ‘food dramas’ came Arabic and Persian culinary poetry

खाद्य सामग्री के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों की अनूठी कहानी

हाल ही में इंटरनेट पर ‘‘फूड ड्रामाज’’ नामक नए वीडियो का एक ट्रेंड शुरू हुआ है जिसमें व्यंजन और पेय पदार्थ संवाद करते हुए दिखाए जाते हैं, जो विभिन्न नाटकीय परिस्थितियों में फंसे होते हैं। ये वीडियो मनोरंजक जरूर हैं, लेकिन इनसे हमें मध्ययुगीन अरब, फ़ारसी और उर्दू साहित्य की एक दिलचस्प परंपरा की याद आती है, जहां खाद्य पदार्थों और पेड़-पौधों को मानवीय गुणों से सजाया गया था।

11वीं से 19वीं सदी तक, काहिरा से शीराज़ और हिंदुस्तान तक के कवि और कथाकार फूलों, पेड़ों, फलों, सब्ज़ियों और रसोई सामग्री को नायक, विरोधी, शासक और सलाहकार के रूप में प्रस्तुत करते थे। उनके संवादों और संघर्षों के माध्यम से वे अपने सामाजिक तथा सांस्कृतिक परिवर्तनों पर विचार व्यक्त करते थे।

यह साहित्यिक परंपरा रूमी, सआदी, हाफ़िज़, मिर्ज़ा ग़ालिब और अमीर खुसराव जैसे महान कवियों की कविताओं में भी दिखाई देती है। इन कविताओं में गुलाब को कभी प्रियतम, कभी दुल्हन, कभी रानी या बाग़ का सम्राट माना जाता था। ऐसे आलंकारिक प्रयोग उन दिनों के जीवन सामना करने के सामाजिक और सांस्कृतिक रूपांतरण का परिचायक थे।

फूड ड्रामाज की आधुनिक शैलियों से भले ही ये नाटक भिन्न हों, फिर भी दोनों ही काल अपने समय की सामाजिक मानसिकता को प्रतिबिंबित करते हैं। मध्यकालीन कविताएँ जो आज भी हमारे साहित्यिक धरोहर का हिस्सा हैं, उन्होंने भोजन और प्रकृति के माध्यम से जीवन के विविध पहलुओं को उजागर किया है।

यह पहलू इस बात का सूचक है कि साहित्य और कला समय और संस्कृतियों के पार जाकर भी अपने विषयों के माध्यम से मानवीय अनुभवों को साझा कर सकते हैं।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)