बंगाल में अवैध प्रवासियों की वापसी अभियान जोर पकड़ रहा है
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को जानकारी दी कि पिछले एक महीने में 4,800 कथित अवैध प्रवासियों को जिन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नागरिकता का अधिकार नहीं है, बांग्लादेश को वापस भेजा जा चुका है। यह खबर The Hindu ने रिपोर्ट की है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता अधिकारी ने बताया कि फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में 836 अन्य “अवैध घुसपैठिए” रखे गए हैं, जिन्हें जल्द ही बांग्लादेश भेजा जाएगा।
राज्य सरकार ने 22 मई को आदेश जारी कर कहा था कि इन होल्डिंग सेंटरों को कथित अवैध प्रवासियों और उन विदेशी कैदियों के लिए स्थापित किया जाए जो प्रत्यर्पण या देश वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अधिकारी ने The Hindu को बताया, “भारत सरकार के एक कानून के अनुसार, इन अवैध प्रवासियों को जेल भेजने के बजाय सीमा सुरक्षा बल के सुपुर्द किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों ने इस कानून का उपयोग किया है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इन्हें मेहमान की तरह जेलों में रखा गया, उनको हमारे भोजन, वस्त्र और दवाइयां दी गईं।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि नई भाजपा सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सीमा सुरक्षा बल को सीमांकन के लिए भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दी है। The Telegraph की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने कहा, “सीमा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसीलिए हमने सीमा सुरक्षा बल को लगभग 100 किलोमीटर भूमि देने का निर्णय लिया है ताकि वे सीमा पर बाड़ निर्माण कर सकें।”
यह कदम राज्य की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और अवैध प्रवास और सीमा पार अपराधों की रोकथाम के लिए आवश्यक बताया जा रहा है।
पिछले वर्षों में बंगाल में अवैध प्रवासियों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहसें गहराई हैं, और इस नई नीति के तहत कार्रवाई बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि ये उपाय कानूनी रूप से समर्थित हैं और सीमा नियंत्रण का कड़ा संदेश देते हैं।