बिहार सरकार ने प्रधान मंत्री आवास योजना–ग्रामीण के लिए केंद्र से 1,600 करोड़ रुपये की तत्काल आवश्यकता जताई
बिहार सरकार ने ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार से प्रधान मंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 1,600 करोड़ रुपये की राशि जारी करने का औपचारिक अनुरोध किया है। राज्य के एकल नोडल खाते में सीमित शेष राशि के कारण लाभार्थियों को समय पर सहायता प्रदान करने में जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
प्रधान मंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत पूरे राज्य में ग्रामीण इलाकों में किफायती और सुरक्षित आवास प्रदान करना प्राथमिक लक्ष्य है। बिहार, जहां बड़े पैमाने पर ग्रामीण आबादी है, इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता को देखते हुए केंद्र से सहायता मांग रही है।
राज्य के एकल नोडल खाते में शेष धनराशि कम होने के कारण, नए आवास निर्मित करने तथा अधूरे कार्यों को पूर्ण कराने में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है। इसके चलते योजना के लाभार्थियों को समय पर फंड नहीं मिल पाने की स्थिति बन रही है, जो सामाजिक और आर्थिक विकास में बाधा डाल सकती है।
इस संदर्भ में, बिहार सरकार ने केंद्र से तत्काल सहायता की मांग की है ताकि ग्रामीण आवास योजनाओं में देरी और असुविधा से बचा जा सके। केंद्र सरकार की ओर से सहयोग मिलने पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना के तहत पात्र परिवारों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
प्रधान मंत्री आवास योजना–ग्रामीण भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य गरीब और संसाधनहीन वर्गों को उनकी मूलभूत जरूरतें पूरी करने में मदद करना है। बिहार जैसे राज्य में, जहां ग्रामीण अर्धविकास अभी भी एक चुनौती है, यह योजना जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस वित्तीय अनुज्ञप्ति के बाद सरकारें दोनों स्तरों पर मिलकर कार्य करेंगी ताकि ग्रामीण विकास की इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके और आवासीय असमानता को कम किया जा सके।