मुंबई में ठाकरे भाइयों को झटका देने के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी जश्न के मूड में है, वहीं उद्धव ठाकरे खेमे के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बीएमसी चुनाव नतीजों पर कड़ा और बेबाक बयान दिया है।
शनिवार को राउत ने कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को 6 सीटें मिली हैं और कई सीटों पर पार्टी बेहद कम अंतर से हारी है। उन्होंने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) की करीब 12–13 सीटें ऐसी रहीं, जहां मामूली वोटों से हार का सामना करना पड़ा। अगर ये सीटें जीत ली जातीं, तो मुंबई की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर बिल्कुल अलग होती।
संजय राउत ने दावा किया कि इसके बावजूद भाजपा–शिंदे गुट के पास महज चार सीटों का बहुमत है। उन्होंने कहा कि महानगरपालिका सदन में विपक्ष सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है और मुंबई को न तो अडानी के हाथों सौंपा जाएगा और न ही ठेकेदारों का राज चलने दिया जाएगा। राउत ने चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्ष के 100 से ज्यादा पार्षद हर उस फैसले का विरोध करेंगे, जो मुंबई के हित में नहीं होगा।
उन्होंने अपनी ही पार्टी के भीतर ‘जयचंदों’ का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अंदरघात न होता, तो भाजपा की सौ पीढ़ियां भी मुंबई में मेयर नहीं बना पातीं। राउत ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास ऐसे आंकड़े हैं, जिनसे कभी भी तख्तापलट संभव है, लेकिन उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती है।
गौरतलब है कि 2017 के बीएमसी चुनाव में भाजपा को 82 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार पार्टी 89 सीटों तक पहुंची है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को 29 सीटें मिली हैं। यह शिवसेना यूबीटी के रूप में उद्धव ठाकरे का बीएमसी में पहला चुनाव था। विपक्ष के पास कुल 109 से अधिक पार्षद हैं, जबकि सत्ता पक्ष की संख्या 118 तक पहुंचती है।