घाटकोपर में करीब डेढ़ साल पहले एक अवैध विशाल होर्डिंग गिरने से 17 लोगों की मौत और 80 से ज्यादा लोगों के घायल होने की घटना के बाद अब मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर में आउटडोर एडवरटाइजिंग को नियंत्रण में रखने के लिए नई नीति लागू कर दी है। इस दुर्घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और होर्डिंग्स के अनियंत्रित फैलाव पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद BMC ने व्यापक बदलावों का ऐलान किया है।
नई पॉलिसी के तहत अब शहर में लगाए जाने वाले होर्डिंग्स का आकार 40 फीट × 40 फीट से बड़ा नहीं हो सकेगा। फुटपाथों और इमारतों की छतों पर किसी भी तरह का विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। डिजिटल होर्डिंग्स के लिए भी कड़े नियम लागू किए गए हैं—इन पर ब्राइटनेस की सीमा 3:1 रखी गई है और फ्लिकरिंग बिल्कुल नहीं होगी। साथ ही डिजिटल और LED विज्ञापन केवल मॉल, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप और बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसी नियंत्रित जगहों पर ही अनुमति लेकर लगाए जा सकेंगे।
निर्माणाधीन और रेनोवेशन वाली इमारतों के बाहर विज्ञापन लगाने की मंजूरी बनी रहेगी, जबकि विभिन्न डिस्प्ले फॉर्मेट जैसे बैक-टू-बैक, फ्रंट-फेसिंग, L/V-शेप और 3 से 6 साइड वाले होर्डिंग्स की भी अनुमति दी गई है। हालांकि इसके लिए मुंबई ट्रैफिक पुलिस से अनिवार्य अनुमति लेनी होगी।
राजस्व मॉडल में भी बदलाव किया गया है। सरकारी सड़कों पर लगाए जाने वाले विज्ञापनों से होने वाला 70% रेवेन्यू एजेंसी को और 30% BMC को मिलेगा। जब सड़कें औपचारिक रूप से BMC के नियंत्रण में आ जाएंगी, तब उस सड़क के विज्ञापनों से होने वाली पूरी कमाई BMC को ही जाएगी। एडवरटाइज़र को विज्ञापन शुल्क के अलावा नगरपालिका कर भी देना होगा।
नई विज्ञापन नीति में एक स्पॉन्सरशिप मॉडल भी शामिल किया गया है, जिसके तहत कंपनियां, बैंक और डेवलपर सड़क, ट्रैफिक आइलैंड और स्ट्रिप गार्डन के सौंदर्यीकरण के स्पॉन्सर बन सकेंगे। एडवरटाइजिंग एजेंसियों को इस मॉडल में शामिल होने की अनुमति नहीं है। ये एग्रीमेंट तीन वर्षों के लिए मान्य होंगे।
म्युनिसिपल कमिश्नर भूषण गगरानी ने कहा कि यह नई गाइडलाइन मुंबई के आउटडोर एडवरटाइजिंग को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस नीति में शहर की खूबसूरती, सुरक्षा और विज्ञापन उद्योग के व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाने पर खास जोर दिया गया है।