वहीं मृतक पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने जमानत याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि मृतक के बेटे के बयान में आवेदक का नाम नहीं है। अभियोजन के साक्ष्य इस स्तर पर आवेदक की प्रत्यक्ष संलिप्तता को स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं करते। तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना मामले के गुण-दोष पर कोई राय बनाए, प्रथम दृष्टया आवेदक जमानत का हकदार है। हालांकि हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए शर्त लगाई कि वह ट्रायल के दौरान साक्ष्यों से कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा। किसी भी प्रकार से अभियोजन पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा। वह प्रत्येक नियत तिथि पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहेगा। जमानत आदेश जारी करने से पहले जमानतदारों का विधिवत सत्यापन किया जाएगा। अगर इन शर्तों में से किसी का उल्लंघन किया गया तो जमानत निरस्त की जा सकती है। आरोपियों के अधिवक्ता व गौतमबुद्धनगर के बार अध्यक्ष मनोज भाटी एवं अमित भाटी बोड़ाकी ने बताया कि गुरुवार को रोहित की जमानत के लिए सत्र अदालत में जमानती दाखिल करने के साथ अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। शनिवार तक रोहित की जेल से रिहाई संभव है। वहीं ससुर सत्यवीर को भी जल्द हाईकोर्ट से जमानत की उम्मीद है। अन्य आरोपियों की भी जल्द जमानत याचिका दाखिल की जाएगी। सभी आरोपी साक्ष्य के आधार पर बरी होंगे। जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा निक्की का परिवार
मृतका निक्की भाटी के परिवार के अधिवक्ता उधम सिंह तोंगड़ का कहना है कि रोहित को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को खारिज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। मामले में आरोपी सास दया की जमानत अर्जी सत्र अदालत में 14 जनवरी को सुनवाई होगी। विपिन की ओर से अभी सत्र अदालत में जमानत अर्जी दाखिल नहीं की गई है। सास दया और विपिन की जमानत खारिज कराने के लिए अदालत में मजबूत दलील देंगे।

