48 वर्षीय वासुदेव मडावी अपने करियर में अनगिनत ऑपरेशनों का हिस्सा रहे हैं। कई बार भूखे-प्यासे रहकर भी उन्होंने मिशन पूरे किए और अपनी बहादुरी से पूरी पुलिस फोर्स को प्रभावित किया। 1998 में कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए मडावी को लगातार प्रमोशन मिलते गए और आज वे सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। बहादुरी के लिए उन्हें कई पदक भी मिले हैं। गढ़चिरौली के एसपी नीलोत्पल के अनुसार, मडावी ने नक्सल विरोधी अभियानों में बेहद अहम भूमिका निभाई है। वे स्ट्रैटजी बनाने और उसे सही वक्त पर बदलकर दुश्मन को मात देने में माहिर हैं। हाल ही में कोपारशी एनकाउंटर में चार माओवादियों को ढेर करने के बाद उनका आंकड़ा 101 तक पहुंच गया। बड़े ऑपरेशनों में शामिल रहे मडावी
मडावी ने बोरिया कासनसुर एनकाउंटर में हिस्सा लिया था, जिसमें 40 माओवादी मारे गए थे। इसके अलावा वे मर्दिनटोला, गोविंदगांव, कोपारशी-कोटूर और कटरांगट्टा जैसे बड़े ऑपरेशनों में भी शामिल रहे और पांच माओवादियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें अब तक दो गैलेंट्री मेडल मिल चुके हैं। 10 नवंबर 1976 को जन्मे मडावी ने 22 साल की उम्र में गढ़चिरौली पुलिस जॉइन की थी और जल्द ही स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की रीढ़ बन गए। आज भी वे न केवल ऑपरेशनों का नेतृत्व करते हैं, बल्कि अपने साहस और रणनीति से टीम के मनोबल को ऊंचा रखते हैं।