कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का विधेयक किया स्वीकृत
संघीय कैबिनेट ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के लिए एक विधेयक को स्वीकृति प्रदान की है। इस कदम का उद्देश्य न्यायालय की क्षमता और कार्यक्षमता में सुधार करना है ताकि न्याय प्रक्रिया तीव्रता से पूरी हो सके।
सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा और लंबित मामलों का निपटान तेजी से होगा। यह विधेयक 1956 के सुप्रीम कोर्ट नंबर ऑफ जजेस एक्ट में संशोधन करेगा, जो न्यायिक पदों की संख्या निर्धारित करता है।
यह निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया गया है, जो जून या जुलाई में शुरू होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह प्रस्ताव इसलिए आवश्यक है क्योंकि न्यायालय में वर्तमान में लगभग 92,000 मामले लंबित हैं, जिनका निराकरण जल्द से जल्द करना अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी बताया कि 2014 के बाद से न्यायाधीशों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जब भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार सत्ता में आई थी।
इतिहास की बात करें तो 2009 में न्यायालय की अधिकतम संख्या को 26 से बढ़ाकर 31 किया गया था, लेकिन तब कई पदों पर नियुक्ति नहीं की गई थी। बाद में 2019 में इसे 31 से बढ़ाकर 34 किया गया।
संविधान एवं प्रक्रिया
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है। इस संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी प्राप्त कर 1956 के कानून में आवश्यक बदलाव किया जाएगा।
विधेयक लागू होने के पश्चात् न्यायालयीय कॉलेजियम नए पदों पर नियुक्तिका प्रस्ताव तैयार करेगा, जिससे न्यायपालिका की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। यह निर्णय न्यायपालिका की बढ़ती मांगों और लंबित मामलों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।