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ग्रेटर नोएडा: 180 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी कर-ठगी का मामला 

ByAnkshree

Dec 7, 2025

राज्य कर विभाग गौतमबुद्धनगर ने जीएसटी चोरी के दो बड़े मामलों का खुलासा करते हुए लगभग 180 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी कर-ठगी का मामला पकड़ा है। विभागीय जांच में सामने आया है कि दोनों फर्मों ने फर्जी दस्तावेज, फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के सहारे न केवल सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया। बल्कि इन फर्जी क्रेडिट्स को कई अन्य फर्मों को भी अवैध रूप से उपलब्ध कराकर अनुचित लाभ दिलाया। कासना कोतवाली पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
पहला मामला मल्टीकॉम इंटरनेशनल से जुड़ा है। फर्म सर्वश्री मल्टीकॉम इंटरनेशनल का पंजीकरण प्रमोद विजय खुल्लर निवासी सेक्टर-71, नोएडा द्वारा कराया गया था। विभागीय जांच में पाया गया कि खुल्लर ने भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी सप्लाई दिखाई और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त किया। विभाग द्वारा पारित के अनुसार इस फर्म द्वारा कुल 78 करोड़ 44 लाख 24,477 का कर चुराया गया और बराबर राशि का अर्थदंड भी निर्धारित किया गया। इस प्रकार सरकार को कुल 156.88 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। जब विभागीय टीम द्वारा घोषित व्यापार स्थल बी-15, इकोटेक एक्सटेंशन कासना ग्रेटर नोएडा की जांच की गई, तो यहां भी यह फर्म अस्तित्व में नहीं मिली। यहां भी एएनडी हाईटेक नामक दूसरी कंपनी कार्यरत पाई गई। जिससे इस पंजीकृत फर्म से संबंधित कोई सूचना प्राप्त नहीं हो सकी।
दूसरा मामला सिद्धि विनायक एक्सपोर्ट्स से जुड़ा है। राज्य कर विभाग के अनुसार फर्म सिद्धि विनायक एक्सपोर्ट्स का पंजीकरण विकास मिश्रा निवासी राज नगर-2 पालम कॉलोनी बगडोला दक्षिण-पश्चिम दिल्ली द्वारा लिया गया था। दर्ज विवरण के अनुसार विकास मिश्रा द्वारा फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर फर्जी सप्लाई दिखाई गई। जिसके आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त किया गया और आगे अन्य फर्मों को भी गलत लाभ पहुंचाया गया। इस प्रक्रिया में सरकार को 24.92 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि फर्म द्वारा घोषित मुख्य व्यापार स्थल बी-15, इकोटेक एक्सटेंशन कासना ग्रेटर नोएडा पर पहुंचने पर वहां कोई सिद्धि विनायक एक्सपोर्ट्स नाम की इकाई मौजूद नहीं थी। विकास मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दूसरा मामला विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ कि पंजीकरण के दौरान प्रस्तुत दस्तावेज संदिग्ध हैं और फर्म का अस्तित्व प्रमाणित नहीं है।

दोनों फर्मों ने एक ही पते का प्रयोग कियाः दोनों के व्यापार स्थल पर दूसरी कंपनी संचालित पाई गई है। दोनों ही फर्म मालिक संपर्क से बाहर हैं। दोनों मामलों में करोड़ों का राजस्व नुकसान है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह संभवतः एक बड़े संगठित फर्जी इनवॉइसिंग रैकेट का हिस्सा हो सकता है। जिसकी व्यापक जांच आवश्यक है। मामले में सेक्टर-148 स्थित सहायक आयुक्त कर प्रशांत की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ला का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )