• Wed. Sep 23rd, 2026

India Core News | Read Latest Trending News..

आपका इंडिया आपकी न्यूज़

” 8 सप्ताह में पकड़िये delhi-ncr के सभी लवारिस कुत्ते “-SC

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते लावारिस कुत्तों (Stray Dogs) के हमलों और रैबीज की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एनसीआर की संबंधित प्राधिकरणों को शहर की गलियों को लावारिस कुत्तों से मुक्त करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नवजात और छोटे बच्चों को रैबीज का शिकार होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। लोगों को बिना डर के घर से निकलने का भरोसा मिलना चाहिए। इसके लिए अगले छह सप्ताह में 5 हजार लावारिस कुत्तों को शेल्टर में स्थानांतरित करने का काम शुरू होगा। 

डॉग शेल्टर बनाने के सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की सभी प्राधिकरणों को तत्काल डॉग शेल्टर बनाने का आदेश दिया है। इन शेल्टर्स के बुनियादी ढांचे की जानकारी आठ सप्ताह के भीतर कोर्ट को सौंपनी होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाएं और इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाए। सभी शेल्टर्स में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी अनिवार्य होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्राधिकरणों को रिकॉर्ड रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी), नोएडा, गुरुग्राम, और गाजियाबाद प्राधिकरणों को रोजाना का रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया है। इस रिकॉर्ड में गलियों से उठाए गए लावारिस कुत्तों की संख्या दर्ज होगी। कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी उठाए गए कुत्ते को वापस सार्वजनिक स्थानों पर रिलीज नहीं किया जाएगा। ऐसा होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

लोगों को बिना डर के जीने का हक

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में जोर दिया कि दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को लावारिस कुत्तों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार है। यह फैसला न केवल बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को बढ़ावा देगा। कोर्ट ने सभी प्राधिकरणों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )