साइबर जालसाजों ने बचपन का मित्र बताकर फोन किया और मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर 6.64 लाख रुपये की ठगी कर ली। जब पीड़ित बुजुर्ग को पता चला तब पुलिस से शिकायत की। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सेक्टर-78 स्थित एक सोसाइटी में रहने वाले जय प्रकाश एक प्राइवेट कंपनी से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत की है कि पिछले साल 23 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को उनका पुराना स्कूल मित्र अनिल सक्सेना के रूप में परिचय दिया। उसने स्कूल के दिनों में उनके निकनेम का जिक्र किया तब पीडि़त को भरोसा हो गया। इसके बाद कॉलर ने बताया कि उसके एक रिश्तेदार का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसके बैंक की लिमिट पूरी होने की वजह से वह पैसे ट्रांसफर नहीं कर पा रहा है। बुजुर्ग को झांसे में लेने के बाद ठग ने उन्हें एक क्यूआर कोड और यूपीआई आईडी भेजी और कहा कि वह उनके खाते में पैसे भेज रहा है। वह उनके रिश्तेदार के खाते में रकम ट्रांसफर कर दे। इसके बाद जालसाज ने उनके पास रकम क्रेडिट का फर्जी मैसेज भेज दिया और कथित रिश्तेदार के खाते में सात बार में 6.64 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन करा लिया। इसके बाद फिर से जालसाज ने रकम मांगी तो बुुजर्ग ने पेमेंट करने का प्रयास किया लेकिन बैलेंस नहीं था। तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। एडीसीपी शैव्या गोयल का कहना है कि इस मामले में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है और खातों की जांच की जा रही है।