• Thu. Jul 16th, 2026

यूपी को दशहरा-दीपावली से पहले सीएम योगी का बड़ा तोहफा, सड़कों को गड्ढामुक्त करने का सख्त फरमान

Byadmin

Sep 17, 2025
दशहरा-दीपावली से पहले सीएम योगी का बड़ा तोहफादशहरा-दीपावली से पहले सीएम योगी का बड़ा तोहफा

CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी त्योहारी सीजन से पहले प्रदेशवासियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनमोल उपहार देने का संकल्प लिया है। गड्ढा मुक्ति और सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि दशहरा, दीपावली और छठ जैसे पावन पर्वों से पहले प्रदेश की हर सड़क चमचमाती और गड्ढामुक्त होनी चाहिए। इस महत्वाकांक्षी अभियान में अब तक 21.67% प्रगति हासिल की गई है, जिसमें 44,196 किमी सड़कों को दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

सीएम योगी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि नगरीय अवस्थापना के कार्य समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरे हों, अन्यथा महापौर के अधिकारों पर पुनर्विचार किया जाएगा। उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर की रूपरेखा पर विचार-मंथन करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक समृद्धि को भी नई उड़ान मिलेगी।

सड़क नवीनीकरण में पीडब्ल्यूडी की शानदार प्रगति

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सड़क नवीनीकरण में 84.82% की प्रभावशाली प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने अन्य विभागों को भी इस गति को अपनाने और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। रेस्टोरेशन और विशेष मरम्मत के तहत 2,750 किमी सड़कों को चिन्हित किया गया है, जिनके सुधार कार्य को तीव्र करने का आदेश दिया गया। समीक्षा बैठक में सामने आया कि 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में हैं, जिन्हें तत्काल ठीक कर सुचारु यातायात सुनिश्चित करने के लिए सीएम ने कड़े निर्देश जारी किए।

मॉनसून की मार से क्षतिग्रस्त सड़कों का कायाकल्प

मॉनसून की बेरहम बारिश से खराब हुई सड़कों को दुरुस्त करने के लिए सीएम योगी ने मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्यों को तेज करने का आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे हाईवे हों, एक्सप्रेसवे, ग्रामीण सड़कें हों या नगरीय क्षेत्र के मार्ग, सभी को त्योहारों से पहले बेहतरीन स्थिति में लाया जाए, ताकि जनता को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रदेश की कुल 6,78,301 सड़कों (लंबाई 4,32,989 किमी) में से 44,196 किमी को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें औसतन 21.67% प्रगति हासिल हुई है। सीएम ने पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, मंडी परिषद, ग्राम विकास, पंचायती राज, नगर विकास, सिंचाई, गन्ना और चीनी विकास जैसे सभी विभागों से प्रगति की विस्तृत जानकारी ली और कमजोर प्रदर्शन वाले विभागों को तेजी लाने का निर्देश दिया।

नगर विकास और ग्रामीण सड़कों पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों की मरम्मत में तेजी लाने की अपेक्षा जताई। नगर विकास विभाग की समीक्षा में उन्होंने जोर दिया कि नगर निगमों में अवस्थापना कार्यों के लिए आवंटित धनराशि का समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग हो। सड़क नवीनीकरण में 31,514 किमी सड़कों को शामिल किया गया है, जिसमें पीडब्ल्यूडी ने 84.82% की उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। सीएम ने सभी विभागों को समयबद्धता के साथ कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी।

रेस्टोरेशन और विशेष मरम्मत के तहत चिन्हित 2,750 किमी सड़कों में ग्रामीण विकास विभाग ने 62.99%, नगर विकास विभाग ने 35.50% और अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने 48.77% प्रगति दर्ज की है।

30 सितंबर तक सर्वे का लक्ष्य

सीएम योगी ने लोक निर्माण विभाग को 30 सितंबर तक सड़कों का सर्वे पूरा कर कार्ययोजना शासन को सौंपने का निर्देश दिया। त्योहारों को ध्यान में रखते हुए बताया गया कि 649 मार्ग संतोषजनक स्थिति में हैं, जबकि 114 मार्गों की स्थिति चिंताजनक है। इन मार्गों को तत्काल दुरुस्त करने और सुचारु यातायात सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारी मौसम में सड़कों की स्थिति प्रदेश की छवि को दर्शाती है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर: आर्थिक समृद्धि का नया द्वार

बैठक में उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास की रूपरेखा पर भी गहन चर्चा हुई। सीएम योगी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पूर्व-पश्चिम दिशा में केंद्रित हैं। अब समय है कि नेपाल सीमा से लेकर दक्षिणी छोर तक के जिलों को जोड़ने वाला एक मजबूत उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर विकसित किया जाए, जो कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाए।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

मुख्यमंत्री ने इस अभियान को जनता की सुविधा और सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि सभी विभाग पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। कार्यों की प्रगति की दैनिक निगरानी और शासन स्तर पर नियमित रिपोर्टिंग का आदेश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान उत्तर प्रदेश के विकास और समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

आप थके हुए हैं पर आपका दिमाग जगा हुआ क्यों है
पॉवरिका ने SECI से ₹3.85/यूनिट टैरिफ पर 100 मेगावाट की पवन परियोजना बोली जीती
{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}