सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रवींद्र कुमार ने बताया कि नहर की सफाई काम कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले जेसीबी की मदद से सफाई कराई गई लेकिन पूरी गाद नहीं निकल पाई थी। हाल में टूटी नहर को ठीक कराने के लिए पोकलेन मशीन आई थी। ऐसे में चंदू से बसई संयंत्र तक इसी मशीन से नहर की गाद निकलवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि गाद में सिक्के और लोगों द्वारा नहर में प्रवाहित की गई मूर्तियां मिली है। मिट्टी में एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्के गाद में मिले। इससे लोग हाथों से मिट्टी छानते दिखे। लोगों के अनुसार, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भक्त पूजा सामग्री को बहते पानी में विसर्जित करते हैं। इसके साथ ही अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद में नहर में सिक्के भी फेंके जाते हैं। ये सिक्के ज्यादातर गुरुग्राम-फर्रुखनगर रोड पर धनकोट पुल के पास मिलते हैं। सड़क पर अपनी गाड़ियों से यात्रा करने वाले लोग इस पुल के पास रुकते हैं और आस्था के नाम पर नहर में सिक्के फेंकते हैं। पानी के बहाव के कारण सिक्के धीरे-धीरे नहर की तलहटी में जमा हो जाते हैं। अब सफाई का काम चल रहा है। ये जमा हुए सिक्के अब मिट्टी के साथ नहर से बाहर आ रहे हैं। हालांकि अधिकारी ने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर नहरों में प्लास्टिक, कपड़े और दूसरी न सड़ने वाली चीज़ें फेंकने से जल प्रदूषण बढ़ता है।
गुरुग्राम: नहर की सफाई में सिक्के और विश्वकर्मा की मूर्तियां मिलीं
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रवींद्र कुमार ने बताया कि नहर की सफाई काम कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले जेसीबी की मदद से सफाई कराई गई लेकिन पूरी गाद नहीं निकल पाई थी। हाल में टूटी नहर को ठीक कराने के लिए पोकलेन मशीन आई थी। ऐसे में चंदू से बसई संयंत्र तक इसी मशीन से नहर की गाद निकलवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि गाद में सिक्के और लोगों द्वारा नहर में प्रवाहित की गई मूर्तियां मिली है। मिट्टी में एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्के गाद में मिले। इससे लोग हाथों से मिट्टी छानते दिखे। लोगों के अनुसार, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भक्त पूजा सामग्री को बहते पानी में विसर्जित करते हैं। इसके साथ ही अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद में नहर में सिक्के भी फेंके जाते हैं। ये सिक्के ज्यादातर गुरुग्राम-फर्रुखनगर रोड पर धनकोट पुल के पास मिलते हैं। सड़क पर अपनी गाड़ियों से यात्रा करने वाले लोग इस पुल के पास रुकते हैं और आस्था के नाम पर नहर में सिक्के फेंकते हैं। पानी के बहाव के कारण सिक्के धीरे-धीरे नहर की तलहटी में जमा हो जाते हैं। अब सफाई का काम चल रहा है। ये जमा हुए सिक्के अब मिट्टी के साथ नहर से बाहर आ रहे हैं। हालांकि अधिकारी ने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर नहरों में प्लास्टिक, कपड़े और दूसरी न सड़ने वाली चीज़ें फेंकने से जल प्रदूषण बढ़ता है।

