पुलिस ने बृहस्पतिवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। श्री नागाम्बिका धाम ट्रस्ट की ओर से शुभांकर डे ने तहरीर दी है कि आरोपी कंपनी ने मंदिर और आवासीय भवन निर्माण के नाम पर करीब 1.60 करोड़ रुपये लेने के बाद अधूरा और घटिया निर्माण कार्य छोड़ दिया और लगभग 95 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि हड़प ली। ट्रस्ट ने 2 अप्रैल 2024 को वीएमपीएम एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के साथ निर्माण अनुबंध किया था। अनुबंध के तहत गांव खेड़ा चौगानपुर स्थित भूमि पर मंदिर और आवासीय भवन का निर्माण होना था। परियोजना की कुल लागत 2.25 करोड़ रुपये तय की गई थी और भुगतान कार्य की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाना था।
कंपनी और उसके निदेशकों ने शुरुआत से ही पूर्व नियोजित तरीके से ट्रस्ट को गुमराह किया। कंपनी अपने कानूनी नोटिस में 1.25 करोड़ रुपये प्राप्त होने की बात स्वीकार कर चुकी है। जबकि वास्तविक रूप से ट्रस्ट द्वारा करीब 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बैंक खातों और भुगतान रसीदों के दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। निर्माण कार्य में मानकों के विपरीत घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। दिसंबर 2025 में कंपनी बिना किसी पूर्व सूचना के निर्माण स्थल छोड़कर चली गई। जिससे प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।
घटिया निर्माण सामग्री का किया इस्तेमाल : निर्माण गुणवत्ता की जांच के लिए ट्रस्ट ने 7 फरवरी 2026 को एक निजी लैब से रिबाउंड हैमर टेस्ट कराया। रिपोर्ट में कई कॉलमों की कंक्रीट क्षमता भी कम पाई गई, जिसे भवन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। 30 जनवरी 2026 को कराए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में दावा किया गया कि मौके पर वास्तविक निर्माण कार्य की कीमत केवल 65.87 लाख रुपये पाई गई। जबकि कंपनी को करीब 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। कंपनी ने बाद में अपने अधिवक्ता के माध्यम से 22 जनवरी 2026 को एक कानूनी नोटिस भेजकर 85 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। वहीं कोतवाली प्रभारी अजय कुमार का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।
ग्रेटर नोएडा: कंपनी पर 95 लाख हड़पने का आरोप
पुलिस ने बृहस्पतिवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। श्री नागाम्बिका धाम ट्रस्ट की ओर से शुभांकर डे ने तहरीर दी है कि आरोपी कंपनी ने मंदिर और आवासीय भवन निर्माण के नाम पर करीब 1.60 करोड़ रुपये लेने के बाद अधूरा और घटिया निर्माण कार्य छोड़ दिया और लगभग 95 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि हड़प ली। ट्रस्ट ने 2 अप्रैल 2024 को वीएमपीएम एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के साथ निर्माण अनुबंध किया था। अनुबंध के तहत गांव खेड़ा चौगानपुर स्थित भूमि पर मंदिर और आवासीय भवन का निर्माण होना था। परियोजना की कुल लागत 2.25 करोड़ रुपये तय की गई थी और भुगतान कार्य की प्रगति के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाना था।
कंपनी और उसके निदेशकों ने शुरुआत से ही पूर्व नियोजित तरीके से ट्रस्ट को गुमराह किया। कंपनी अपने कानूनी नोटिस में 1.25 करोड़ रुपये प्राप्त होने की बात स्वीकार कर चुकी है। जबकि वास्तविक रूप से ट्रस्ट द्वारा करीब 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बैंक खातों और भुगतान रसीदों के दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। निर्माण कार्य में मानकों के विपरीत घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। दिसंबर 2025 में कंपनी बिना किसी पूर्व सूचना के निर्माण स्थल छोड़कर चली गई। जिससे प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।
घटिया निर्माण सामग्री का किया इस्तेमाल : निर्माण गुणवत्ता की जांच के लिए ट्रस्ट ने 7 फरवरी 2026 को एक निजी लैब से रिबाउंड हैमर टेस्ट कराया। रिपोर्ट में कई कॉलमों की कंक्रीट क्षमता भी कम पाई गई, जिसे भवन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। 30 जनवरी 2026 को कराए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में दावा किया गया कि मौके पर वास्तविक निर्माण कार्य की कीमत केवल 65.87 लाख रुपये पाई गई। जबकि कंपनी को करीब 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। कंपनी ने बाद में अपने अधिवक्ता के माध्यम से 22 जनवरी 2026 को एक कानूनी नोटिस भेजकर 85 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। वहीं कोतवाली प्रभारी अजय कुमार का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।

