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दिल्ली HC ने 12वीं पास छात्रों को दी राहत, CBSE के फैसले को बताया मनमाना

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई के उस फैसले को रद कर दिया है, जिसमें 2025 में 12वीं पास छात्रों के लिए अतिरिक्त विषय की सुविधा वापस ले ली गई थी। कोर्ट ने इसे मनमाना और पिछली तारीख से लागू किया गया बताया, जो कानूनन गलत है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि नीतिगत बदलाव भविष्य में लागू होने चाहिए। कोर्ट ने सीबीएसई को तीन दिन में छात्रों का पंजीकरण करने का निर्देश दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने CBSE के दो नोटिफिकेशन रद कर दिए, जिसमें वर्ष 2025 में 12वीं पास करने वाले छात्रों के लिए प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर अतिरिक्त विषय में बैठने की सुविधा वापस ले ली गई थी।

कोर्ट ने कहा कि यह फैसला मनमाना था, इसे पिछली तारीख से लागू किया गया और यह कानूनन गलत है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने छात्रों की याचिकाएं मंजूर करते हुए कहा कि सीबीएसई के परीक्षा उपविधि को बिना उचित सूचना दिए बदला नहीं जा सकता।

कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी नीति में बदलाव केवल भविष्य में लागू हो सकता है, न कि उन छात्रों पर जिन्होंने पहले से ही पुराने नियमों के भरोसे अपने फैसले लिए हों।

छात्रों को राहत देते हुए कोर्ट ने कहा कि यह संशोधन सितंबर, 2025 में ही सार्वजनिक किया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं ने मई, 2025 में अपनी बोर्ड परीक्षा पास कर ली थी और वे पहले से ही मौजूदा पॉलिसी के अनुसार काम कर रहे थे।

याचिकाकर्ता छात्रों ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में 12वीं पास करने के बाद एक वर्ष का गैप लिया क्योंकि सीबीएसई के नियमों के तहत दो साल के अंदर अतिरिक्त विषय देने की अनुमति थी। लेकिन सितंबर 2025 में अचानक यह सुविधा खत्म कर दी गई।

कोर्ट ने कहा कि छात्रों की वैध अपेक्षा थी कि उन्हें पहले जैसी सुविधा मिलेगी। बिना पूर्व सूचना सुविधा खत्म करना प्रशासनिक मनमानी है। कोर्ट ने सीबीएसई को तीन दिन के अंदर छात्रों का रजिस्ट्रेशन करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्रों को एनआइओएस की ओर भेजना व्यावहारिक समाधान नहीं है क्योंकि इससे उनकी पूरी पढ़ाई की निरंतरता टूटती है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )