दिल्ली सरकार ने राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब दिल्ली में 11 की जगह 13 राजस्व जिले और 39 सब-डिविजन होंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से प्रशासनिक कामकाज सरल होगा और आम नागरिकों को सेवाएं तेजी से मिलेंगी।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि वर्षों से लंबित इस मुद्दे को उनकी सरकार ने सिर्फ 10 महीनों में सुलझा लिया, जिसे पहले की सरकारें नहीं कर पाईं।
सरकार के अनुसार, दिल्ली जैसे बड़े महानगर में बेहतर समन्वय, तेज सेवा वितरण और प्रभावी शिकायत निवारण के लिए छोटे और संतुलित जिलों की जरूरत थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब सभी 13 जिलों की सीमाएं दिल्ली नगर निगम, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड की सीमाओं के अनुरूप होंगी। इससे सेवाओं में देरी, सीमाओं को लेकर भ्रम और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याएं दूर होंगी।
नई संरचना के तहत जहां जिलों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 की जा रही है, वहीं सब-डिविजन भी 33 से बढ़ाकर 39 किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे अधिकारियों का कार्यभार संतुलित होगा और नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ जल्दी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि सभी 13 जिलों में आधुनिक और बहु-विभागीय ‘मिनी सचिवालय’ बनाए जाएंगे। इन मिनी सचिवालयों में राजस्व कार्यालय, एसडीएम, एडीएम, तहसील, उप-पंजीयक कार्यालय समेत कई सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी, जिससे लोगों को बार-बार अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की संख्या 22 से बढ़ाकर 39 की जाएगी। इन कार्यालयों की सीमाएं भी सब-डिविजन के अनुरूप तय की जाएंगी। इससे भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटलीकरण में तेजी आएगी और नागरिकों को दूर-दराज जाकर रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि नई जिला संरचना से प्रशासन नागरिकों के और करीब आएगा, शिकायतों का समाधान तेजी से होगा, सीमाओं से जुड़ा भ्रम खत्म होगा और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ेगी।