दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और 2019 की जामिया हिंसा की अलग से जांच कराने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इन मामलों में SIT या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि इन घटनाओं की जांच को लेकर कई सवाल हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई और जांच के तरीके पर भी आपत्ति जताते हुए मामले की दोबारा और स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
दंगों से जुड़े मामले में कुछ राजनीतिक नेताओं के कथित भड़काऊ बयानों का मुद्दा भी उठाया गया था। याचिका में ऐसे बयानों को लेकर FIR दर्ज करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
वहीं, जामिया मामले में दिसंबर 2019 में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि इस घटना की जांच दिल्ली पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
हाईकोर्ट की पीठ ने इन सभी मांगों को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों मामलों में अलग SIT जांच की उम्मीद कर रहे याचिकाकर्ताओं को झटका लगा है।
बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इससे कुछ महीने पहले दिसंबर 2019 में CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जामिया इलाके में भी हिंसा हुई थी।

