दिल्ली टैक्सी और परिवहन एसोसिएशन संसद तक मार्च करेगा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के विरोध में
दिल्ली के टैक्सी संचालक और परिवहन एसोसिएशन ने केंद्र सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य करने के विरोध में संसद तक मार्च करने का ऐलान किया है। यह कदम ईंधन की गुणवत्ता और वाहनों के रखरखाव को लेकर उठे कई सवालों के मद्देनजर लिया गया है।
टैक्सी संचालकों का आरोप है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचता है और इसके कारण नियमित रख-रखाव की लागत बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल चालक प्रभावित होते हैं, बल्कि आम उपभोक्ता भी महंगे किराये और सेवा घटिया होने के दुष्परिणाम झेलते हैं।
सरकार ने इथेनॉल मिश्रण को पर्यावरण संरक्षण और आयात पर निर्भरता कम करने की नीति के तहत बढ़ावा दिया है। हालांकि, इस दिशा में पहल करने के बावजूद वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं। टैक्सी एवं परिवहन एसोसिएशन का मानना है कि इस नीति के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन और सुधार आवश्यक है, अन्यथा इसका सीधा असर जनता की जेब और परिवहन प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़ेगा।
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वे शीघ्र ही संवाद स्थापित करें और एक स्थायी समाधान निकालें जिससे सभी हितधारकों के हितों की रक्षा हो सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे और अपनी आवाज़ पूरे देश के सामने रखेंगे।
इस विरोध के पीछे परिवहन उद्योग की चिंता स्पष्ट है, जो ईंधन परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार से सहयोग की उम्मीद करता है। आम जनता और पर्यावरण दोनों के हित में बेहतर नीति बनाने के लिए सभी पक्षों का संवाद आवश्यक माना जा रहा है।