महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों के हमलों पर अपनी बात रखी है। उन्होंने अपने काम करने के तरीके को समझाते हुए कहा कि उनकी रफ्तार कछुए जैसी धीमी नहीं है, लेकिन वे उससे धैर्य और अनुशासन की सीख जरूर लेते हैं।
फडणवीस ने बताया कि जब राजनीति में विरोधी उन पर तीखे हमले करते हैं या आलोचना करते हैं, तो वे कछुए की तरह अपने सुरक्षा कवच में सिमट जाते हैं। इस दौरान वे बेवजह की बहस में उलझने के बजाय अपने काम पर ध्यान देते हैं।
मुख्यमंत्री ने विरोधियों को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीति में कुछ समय की चर्चा और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले लोग जल्द ही भुला दिए जाते हैं। उनके मुताबिक, असली पहचान फैसलों के नतीजों और जमीन पर किए गए काम से बनती है। जनता सकारात्मक बदलावों को लंबे समय तक याद रखती है।
फडणवीस ने कहा कि अगर उन्हें अपने फैसलों पर भरोसा है और वे सही दिशा में काम कर रहे हैं, तो आलोचनाओं से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे विरोध के बावजूद लगातार और मजबूती से आगे बढ़ते रहते हैं।
अपनी कार्यशैली के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विवादों में फंसने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना पसंद करते हैं। जब आलोचनाएं तेज होती हैं, तो वे फालतू की बहस से दूरी बनाकर कुछ समय तक शांत रहते हैं। हालात सामान्य होने के बाद वे फिर से अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने में जुट जाते हैं।
फडणवीस ने भरोसा जताया कि भले ही वे तेजी से फैसले लेते हैं और उनकी काम करने की रफ्तार तेज है, लेकिन कछुए से मिलने वाली निरंतरता और धैर्य की सीख उन्हें अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करती है।

