एमसीडी में बच्चों, शिक्षकों और आम नागरिकों से जुड़े पारंपरिक उत्सव धीरे-धीरे इतिहास बनते जा रहे हैं। बाल दिवस, वसंत मेला और विभिन्न त्योहारों पर होने वाले आयोजन पिछले दो वित्तीय वर्षों की तरह वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी नहीं किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन आयोजनों के लिए हर वर्ष बजट में अलग से प्रावधान होने के बावजूद एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा रहा।
एमसीडी के बजट में प्रतिवर्ष बाल दिवस, बसंत मेला और अन्य सांस्कृतिक उत्सवों के आयोजन के लिए लगभग 10-10 लाख रुपये का प्रावधान किया जाता है। बावजूद इसके, न तो कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और न ही इस मद से कोई व्यय हो रहा है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि जब बजट मौजूद है तो फिर इन आयोजनों को लगातार क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।
14 नंवबर को होता था समारोह
बाल दिवस का आयोजन कभी एमसीडी की पहचान हुआ करता था। वर्ष 2012 से पहले हर साल 14 नवंबर को अंबेडकर स्टेडियम में भव्य बाल दिवस समारोह आयोजित किया जाता था। इस कार्यक्रम में एमसीडी के सभी 12 जोनों के हजारों स्कूली बच्चे हिस्सा लेते थे और विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते थे। इस तरह खेल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बच्चों के सम्मान जैसे कार्यक्रमों के जरिए यह दिन बच्चों के लिए यादगार बनता था।
इतना ही नहीं, देश के किसी न किसी बड़े नेता की मौजूदगी इस आयोजन को खास बनाती थी। एमसीडी के विभाजन के बाद तीन नगर निगम बने, तब भी सीमित संसाधनों के बावजूद बाल दिवस और शिक्षक दिवस जैसे आयोजन होते रहे। लेकिन वर्ष 2022 में नगर निगमों का एकीकरण हुआ, तो इन आयोजनों की परंपरा पूरी तरह थम गई। जबकि नगर निगम के एकीकरण के बाद उम्मीद की जा रही थी कि बड़े स्तर पर आयोजन फिर से शुरू होंगे।
शिक्षक दिवस भी नहीं मनाया गया
हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करने की परंपरा रही है लेकिन इस वर्ष न कोई कार्यक्रम हुआ और न किसी शिक्षक को सम्मानित किया गया। एमसीडी के शिक्षक और छात्र इन आयोजनों का सालभर इंतजार करते थे। शिक्षकों का कहना है कि बाल दिवस और शिक्षक दिवस जैसे कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता नहीं थे, बल्कि इससे स्कूलों में सकारात्मक माहौल बनता था। वसंत मेला और त्योहारों से जुड़े आयोजन भी पहले एमसीडी की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा थे। इन आयोजनों में नागरिकों की भागीदारी होती थी और एमसीडी व जनता के बीच संवाद मजबूत होता था।

