इलेक्ट्रिक एसयूवी की बिक्री में अप्रत्याशित वृद्धि, पर्यावरणीय लक्ष्यों पर सवाल
पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को हरित परिवहन का भविष्य बताया गया है, लेकिन हाल की एक रिपोर्ट दर्शाती है कि इलेक्ट्रिक कारों के आकार और प्रकार में एक अनदेखा बदलाव हो रहा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में बड़े मॉडल, विशेष रूप से स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (एसयूवी) का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है। यह प्रवृत्ति पारंपरिक धारणाओं के विपरीत है, जिसमें छोटे और पर्यावरण अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने की बात की जाती रही है।
चीन में 2025 में इलेक्ट्रिक एसयूवी की बिक्री इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री का 60% से अधिक है। यूरोप में यह आंकड़ा लगभग 75% तक पहुँच गया है, जबकि अमेरिका में यह 85% से ऊपर है।
एसयूवी के उत्सर्जन इतने अधिक हैं कि यदि वे किसी देश के रूप में देखे जाएं तो वे दुनिया के पांच प्रमुख कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक देशों में शामिल होंगे। समस्या केवल उनके धुंआ उत्सर्जन से नहीं जुड़ी है, बल्कि उनकी बड़ी काया, अधिक वजन, उच्च लागत और मोटरवाहन पर निर्भर जीवनशैली को प्रोत्साहित करने से भी संबंधित है।
जहां इलेक्ट्रिक एसयूवी पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में टेलपाइप उत्सर्जन कम करते हैं, वहीं उनके लिए बड़ी बैटरियों, अधिक कच्चे माल और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। साथ ही, ये वाहन सड़क पर अधिक स्थान घेरते हैं और इनके वजन के कारण टायर, ब्रेक तथा सड़क की घिसावट से निकलने वाली सूक्ष्म धूल से भी प्रदूषण बढ़ता है, जो श्वसन और हृदय रोगों के लिए हानिकारक है।
बड़े वाहन सड़कों को बच्चों सहित पैदल यात्रियों के लिए खतरा भी बढ़ाते हैं। ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन के अनुसार, 0-18 वर्ष के बच्चों पर हुए वाहन दुर्घटनाओं में एसयूवी का योगदान चिंताजनक स्तर पर है।
इस प्रकार यह स्पष्ट है कि इलेक्ट्रिक एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता पर्यावरण और शहरों की सुरक्षा दोनों के लिए नए चैलेंज पैदा कर रही है, जिसे नीति निर्धारण में गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है।