गुरुग्राम। निजी कंपनी पर लगाए गए 5.32 लाख रुपये का बिजली बिल को अदालत ने सही ठहराते हुए कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश सिविल जज (जूनियर डिवीजन) संतोष ने दिया है।
वर्धमान इन्फ्रा फैब कंपनी की तरफ से डाली गई याचिका में बताया कि उनकी कंपनी आईएमटी मानेसर सेक्टर-8 में है। अगस्त 2015 बिजली निगम की तरफ से 90 हजार रुपये का बिजली बिल आया था। इसके बाद धीरे-धीरे करने दिसंबर तक यह बिल 5.52 लाख रुपये का हो गया था। उन्होंने 11 जनवरी 2016 को यह बिल भर दिया था। इसके बाद उन्होंने बिजली निगम से उनके बिजली मीटर की जांच करने के लिए शिकायत दी थी लेकिन उनके मीटर की जांच नहीं की गई। उनका कहना था कि मीटर अतिरिक्त यूनिट की खपत बता रहा पहले उनका बिजली बिल कम आता था।
बचाव पक्ष की तरफ से दलील दी गई है कि याचिकाकर्ता की तरफ से बिजली बिल नहीं भरने पर बिजली बिल पर ब्याज लगने के साथ ही बिजली खपत का बिल जुड़ता रहा। उनकी तरफ से अगस्त 2015 के बाद जनवरी 2016 में ही बिल दिया गया। उनकी तरफ से 2018 में अदालत में केस दायर किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि बिजली बिल ठीक लिया गया।