विथाबाई नरायणगांवकर: महाराष्ट्र की तामाशा परंपरा की जीवंत गाथा
तामाशा के रंगमंच पर मातृत्व और कला का अनूठा संगम विथाबाई नरायणगांवकर का नाम महाराष्ट्र की तामाशा परंपरा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा गया है। हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म एथा में उनकी जीवन गाथा को पर्दे पर लाया गया है, जिसमें दर्शकों को उनकी अद्भुत कला और संघर्ष की झलक मिलती है। विथाबाई नरायणगांवकर का जन्म 1 जुलाई, 1935 को पंढरपुर के दलित मंग परिवार में हुआ था, जो तामाशा की परंपरा में गहरे जड़े थे। तामाशा, महाराष्ट्र की एक संगीत एवं नृत्य पर आधारित लोक कला है, जिसमें नाटकीयता, सूक्ष्म व्यंग्य और सांस्कृतिक कथाओं का समावेश होता है।

