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Fake Degree Scam: 300 से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, बिहार कनेक्शन से यूपी तक मचा हड़कंप

Report By : ICN Network

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के अधीन संचालित दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की मार्कशीट और डिग्रियां राज्य के बाहर धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। 19 मार्च, बुधवार को देशभर के कई विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। इस गिरोह द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) सहित देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों की नकली मार्कशीट तैयार की जा रही थीं।

इन फर्जी दस्तावेजों के साथ युवाओं को सत्यापन की गारंटी भी दी जाती थी। एसटीएफ द्वारा आगरा में गिरफ्तार किए गए सरगना ने पूछताछ में खुलासा किया कि नकली मार्कशीट के सहारे 300 से ज्यादा युवा सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं।

40 विश्वविद्यालयों की 900 से अधिक फर्जी डिग्रियां बरामद
जांच में विभिन्न प्रदेशों के 40 विश्वविद्यालयों से जुड़ी 900 से अधिक तैयार मार्कशीट और डिग्रियां बरामद की गई हैं। इनमें मिथिला विश्वविद्यालय के अधीन संचालित दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की रिक्त मार्कशीट और डिग्रियां भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में पिछले पांच वर्षों से नामांकन की प्रक्रिया बंद है। नैक की शर्तों के चलते नामांकन पर रोक लगी हुई है, बावजूद इसके दलाल बैक डेट में फर्जी डिग्रियां उपलब्ध करवा रहे हैं।

आगरा में चल रहा था फर्जी डिग्री का खेल
फर्जी मार्कशीट बनाने का गोरखधंधा आगरा स्थित नोटपैड एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस में संचालित हो रहा था। एसटीएफ इंस्पेक्टर हुकुम सिंह के नेतृत्व में की गई छापेमारी में कंपनी के सीईओ धनेश मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। मौके से दूरस्थ शिक्षा निदेशालय सहित देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की 944 तैयार मार्कशीट और 104 खाली मार्कशीट जब्त की गई हैं।

फर्जी डिग्री के लिए 20 हजार से ढाई लाख तक वसूली
गिरफ्तार आरोपी धनेश मिश्रा ने खुलासा किया कि वह मांग के अनुसार निजी विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार करता था। अब तक वह 8,000 से अधिक नकली मार्कशीट और डिग्रियां बना चुका है।

  • बी.फार्मा, डी.फार्मा, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स की डिग्रियां 2 से 2.5 लाख रुपये तक बेची जाती थीं।
  • बीए और बीकॉम जैसी डिग्रियों के लिए 20 हजार से 50 हजार रुपये तक की मांग की जाती थी।
  • अब तक 300 से अधिक युवा फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके हैं।

डिग्री बेचने का खेल जारी, पहले भी हुआ था खुलासा
दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में नामांकन प्रक्रिया पांच वर्षों से बंद है, फिर भी यहां से फर्जी डिग्रियों का धंधा बदस्तूर जारी है। वर्षों से नकली मार्कशीट और डिग्रियों की अवैध खरीद-फरोख्त होती आ रही है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)