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मेरठ मेडिकल कॉलेज में AC ब्लास्ट से लगी आग, बिल्डिंग के कई हिस्सों में भरा धुवां,दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंची

Report By : Rishabh Singh, ICN Network

मेरठ मेडिकल कालेज में शुक्रवार सुबह AC में ब्लास्ट होने के बाद गायनी वार्ड के ऑपरेशन थिएटर में आग लग गई। तीसरी मंजिल पर आग लगने से पूरी बिल्डिंग में धुआं भर गया। यह मेडिकल कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग है। बताया जा रहा है कि 2AC की क्षमता वाली वायरिंग से 6 AC चलाए जा रहे थे। इसी वजह से शॉर्ट सर्किट और लोड बढ़ने से ब्लास्ट के साथ AC फट गया।

पूरी बिल्डिंग है ओटी कॉम्प्लेक्स

मेडिकल कालेज के जिस चार मंजिला इमारत में आग लगी है वो दरअसल पूरा ओटी काम्प्लैक्स है। इस काम्प्लैक्स के फर्स्ट फ्लोर पर जनरल ओटी, सेकेंड फ्लोर पर ENT ओटी और थर्ड फ्लोर पर गायनी ओटी है। आग इसी फ्लोर पर लगी है।

हालांकि आग से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। क्योंकि सभी ओटी 8 बजे के बाद चालू होते हैं। लेकिन आग उससे पहले करीब साढ़े 6 बजे लगी। इस दौरान मरीज भी नहीं थे।

मेडिकल अस्पताल में आग लगने की सूचना के बाद फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर फाइटर्स ने बिल्डिंग के बाहर और अंदर दोनों तरफ से पानी फेंका तब जाकर कहीं आग बुझी है। ब्लास्ट होने के बाद तुरंत बिल्डिंग से मेडिकल सेफ्टी इक्विपमेंट, बेड रोल, ऑक्सीजन सिलेंडर को भी मेडिकल स्टाफ ने बाहर निकाला।

आग लगने के बाद पूरे कांप्लेक्स में धुआं इतना ज्यादा भर गया कि बिना मास्क लगाए वहां खड़ा होना मुश्किल हो गया। अंदर भरे धुएं को बाहर फेंकने के लिए स्मोक अब्जॉर्वर लगाना पड़ा। ताकि अंदर भरा धुआं वेंटिलेट हो सके। मौके पर थोड़ी देर बाद मेडिकल अस्पताल प्रिंसिपल आरसी गुप्ता भी पहुंचे।

चीफ फायर ऑफिसर संतोष राय ने बताया कि चार फ्लोर के अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में आग लगी है। मौके पर तुरंत फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां भेजी गईं और आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। कोई जनहानि नहीं हुई है। आग शॉर्ट सर्किट होने के कारण लगी जो बाद में एसी तक पहुंची।

अस्पताल का ओटी कांप्लेक्स है। गायनी ओटी के एसी में आग लगी है। ओटी 8 बजे के बाद शुरू होती है। आग उससे पहले लगी है। इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। कितना नुकसान हुआ है यह कहना अभी मुश्किल है। आग कैसे लगी इसकी भी जांच कराई जा रही है।

  • अब आपको एक दिन पहले नोएडा की बिल्डिंग में एसी फटने की घटना के बारे में बताते हैं…

नोएडा की लोटस बुलेवर्ड सोसाइटी में एसी फटने से गुरुवार सुबह भीषण आग लग गई। टावर नंबर-28 में 10वीं फ्लोर के फ्लैट में सुबह करीब 10 बजे स्प्लिट एसी में आग लग गई। जब तक घर के लोग कुछ समझ पाते तब तक एसी में ब्लास्ट हो गया। तेज धमाके से वहां भगदड़ जैसे हालत हो गए।

आसपास के फ्लैट के लोग भागकर बाहर आए। अपार्टमेंट की सिक्योरिटी ने अलॉर्म बजाकर तुरंत सभी फ्लैट खाली करवाए। इधर, फ्लैट में बेडरूम व अन्य कमरों तक आग पहुंच गई। धुएं और आग की तपिश से बिल्डिंग का फायर सिस्टम एक्टिव हो गया। इसने आग को आगे बढ़ने से रोक लिया।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
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