मुजफ्फरपुर, बिहार — भारतीय लोक कला जैसे बिहार की मधुबनी पेंटिंग, मंजुषा कला, टिकुली कला, महाराष्ट्र की वरली चित्र कला, राजस्थान की पिचवई चित्रकला, आंध्र प्रदेश की कलाकारी इत्यादिको सहेजने और उसे आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने की दिशा में ‘रंग बिहार’ (Rangg Bihar) एक नई मिसाल पेश कर रहा है। मुजफ्फरपुर स्थित यह संस्थान “परम्परा से आधुनिकता तक का सफर” तय करते हुए हस्तशिल्प और लोक कला के क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
‘रंग बिहार’ मुख्य रूप से भारत की पारंपरिक हस्त-निर्मित लोक कला (Hand-painted Folk Art) को विभिन्न उत्पादों के माध्यम से लोगों तक पहुँचा रहा है। इनके पास कलात्मक वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है, जिसमें शामिल हैं:
परिधान: हाथ से पेंट की गई साड़ियाँ और कपड़े।
होम फर्निशिंग: घर की सजावट के लिए कलात्मक सामान।




एक्सेसरीज: विशेष रूप से डिजाइन किए गए पर्स, बैग और अन्य कई वस्तुएं।
संस्थान का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों की मेहनत और कला को ‘Traditional & Vibrant’ (पारंपरिक और जीवंत) रूप में पेश करना है। ‘रंग बिहार’ का केंद्र ओशो ध्यान केंद्र, सिकंदरपुर, बांध रोड, मुजफ्फरपुर में स्थित है, जहाँ से यह अपनी कलात्मक यात्रा को संचालित कर रहे हैं।
आज के डिजिटल युग में, यह ब्रांड न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर के कला प्रेमियों से जुड़ा हुआ है। ‘रंग बिहार’ की यह पहल बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पीढ़ी के लिए सुलभ और आकर्षक बना रही है।





