पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार को धमकियों का सामना
सेवानिवृत्त बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश गौतम शीरीष पटेल और उनके परिवार पर भारत तथा यूनाइटेड किंगडम में अगस्त से लगातार धमकियां और हिंसक घटनाएं हो रही हैं। यह झटका 2024 के दाउदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में दिए गए उनके फैसले को लेकर है, जिसकी जानकारी उन्होंने सोमवार को Scroll से साझा की।
सबसे हालिया घटना शुक्रवार को हुई जब उनकी पुत्री अदिति पटेल को एक गुमनाम पत्र मिला, जिसमें उन्हें और उनके परिवार को जलाने की धमकी दी गई थी। इस धमकी में पुरानी चेतावनियों का उल्लंघन करने के कारण यह चेतावनी दी गई थी।
22 अप्रैल को लंदन में स्कूल छोड़ने के बाद लौटते वक्त अदिति पर एक नकाबपोश हमलावर ने हमला किया था, जिसमें उनका नाक घायल हो गया था। यह हमला उनके परिवार के खिलाफ जारी खतरे का एक और गंभीर उदाहरण था।
धमकियां गौतम पटेल के 22 अप्रैल 2024 के फैसले से जुड़ी हैं, जिसमें उन्होंने दाउदी बोहरा उत्तराधिकार मामले में मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन को इस शिया मुस्लिम संप्रदाय के वैध नेता के रूप में मान्यता दी थी। उन्होंने तहेर फखरुद्दीन के नेतृत्व वाले गुट द्वारा उनकी नेतृत्व चुनौती वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
अदिति को मिले पत्र में बताया गया कि उनके परिवार की हत्या के लिए एक “गैंग” को भुगतान किया गया है और इस हमले को रोकने का एकमात्र तरीका “पिछले पत्र में दी गई हिदायतों का पालन करना” बताया गया है। पत्र एक नकली लंदन पते से भेजा गया था और उस पर एक जर्मन डाक टिकट लगा था, जैसा कि हिंदुस्तान टाइम्स में उल्लेखित है।
यहां संलग्न एक मेमोरी कार्ड भी था, जिसमें और कई जानकारियां थीं।
यह घटनाक्रम न्यायिक निर्णय के पश्चात न्यायिक सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करता है, तथा दर्शाता है कि संवैधानिक व्यवस्था में न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए सुरक्षा कवच कितना आवश्यक है।
गतिविधियों पर निरंतर पैनी नजर रखने और आवश्यक क़ानूनी कार्रवाई के साथ-साथ, परिवार की सुरक्षा को सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन agencies की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाए जा रहे हैं। न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और समाज में शांति स्थापित करने के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऐसे दुर्भावनापूर्ण प्रयास विफल हों।