मुंबई की गोल्ड लोन कंपनी से 18 अनधिकृत ट्रांजैक्शन के माध्यम से 78.1 लाख रुपये की चोरी
मुंबई के परेल क्षेत्र में स्थित एक गोल्ड लोन कंपनी के ऋण प्रबंधन सॉफ्टवेयर तक हैकर्स द्वारा पहुंच बनाने के बाद लगभग 78.1 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। आरोपितों ने एक घंटे से भी कम समय में 18 धोखाधड़ीपूर्ण फंड ट्रांसफर किए। मुंबई के सेंट्रल साइबर पुलिस ने 17 जुलाई को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, ये लेन-देन 13 जुलाई को हुए जब हैकर्स ने कंपनी के ओम्नीफिन लोन मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) और उससे जुड़े भुगतान इंटरफेस को अवैध रूप से एक्सेस किया। ऐसा माना जा रहा है कि ह्याकरों ने कंपनी के बैंकिंग सिस्टम के साथ API आधारित कनेक्शन का दुरुपयोग किया।
API के जरिए कंपनी का लोन मैनेजमेंट सिस्टम बैंक को सीधे भुगतान निर्देश भेजता है, जिसके लिए हर ट्रांजैक्शन पर OTP या मैनुअल स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस API इंटीग्रेशन को पे स्प्रिंट प्रा. लि. के माध्यम से जोड़ा गया है। इस प्रणाली का उपयोग स्वीकृत लोन के बाद स्वचालित रूप से राशि ट्रांसफर करने के लिए नियमित रूप से होता है।
TOI के अनुसार, सभी लोन डिस्बर्सल कंपनी के चालू खाते से ही किए जाते हैं। धोखाधड़ी करने वालों ने 18 अनधिकृत लेन-देन किए, जिनमें से प्रत्येक ट्रांसफर लगभग 2 लाख से 7 लाख रुपये के बीच था। ये पैसे जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के अलग-अलग बैंक खातों में भेजे गए।
कंपनी को 14 जुलाई को अपनी नियमित सुलह प्रक्रिया के दौरान इस फर्जीवाड़े का पता चला। अधिकारियों ने ऐसे लेन-देन देखे जो किसी भी स्वीकृत लोन या ग्राहक अनुरोध से मेल नहीं खा रहे थे।
इसके बाद कंपनी ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 को घटना की जानकारी दी। 16 जुलाई को कंपनी ने लाभार्थी बैंक खाताधारकों और अन्य संदिग्ध साथियों के खिलाफ औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई।
मुंबई सेंट्रल साइबर पुलिस ने 17 जुलाई को एफआईआर दर्ज की। जांचकर्ताओं ने उन बैंकों से धन हस्तांतरण के खाते विवरण मांगे हैं जहां पैसे भेजे गए थे और साथ ही उन खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कंपनी या बैंकिंग सिस्टम में कोई व्यक्ति इस मामले में संलिप्त है। जांच अभी जारी है।