निवासियों ने बताया कि जीएमडीए और ट्रैफिक डीसीपी ने करीब 10 दिन पहले उस खंभे को हटाने के लिए एचवीपीएन को पत्र लिखा है, जिसमें बताया गया है कि अगर इसकी वजह से कोई दुर्घटना हुई तो इसकी जिम्मेदारी बिजली निगम की होगी। वहीं, एचवीपीएन की एसडीओ पूनम चंद ने बताया कि बजघेड़ा और पालम विहार में सड़क के बीचोबीच बने खतरनाक खंभे को हटाए जाने का वर्क ऑर्डर जारी हो गया है। इस प्रक्रिया के पूरे होने में करीब दो महीने का समय लगेगा। 15 दिन में उसे हटाकर दूसरी जगह लगाने के लिए खंभा तैयार होगा।
सेक्टर-102 के खंभे के संबंध में एचवीपीएन के मानेसर के एसडीओ भुट्टो खान ने बताया कि 66 केवी से ज्यादा के खंभों को हटाने के लिए एप्रूवल की जरूरत होती है। उन्होंने जीएमडीए को लिखा है। खंभा उनकी जमीन पर है या तो किसी प्राइवेट वेंडर से वे खुद खंभा हटवाएंगे या इसकी अनुमति देंगे ताकि एचवीपीएन टेंडर कर इसे हटवा सके। अनुमति पत्र मिलने के बाद मुख्यालय के अनुमति लेकर इसे हटाने प्रक्रिया की जाएगी।

