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सोना-चांदी का 70:30 फॉर्मूला कितना कारगर? जानिए मोतीलाल ओसवाल के प्रतीक ओसवाल की राय

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पैसिव बिज़नेस हेड प्रतीक ओसवाल का मानना है कि कम लागत, पारदर्शिता और लंबी अवधि की रणनीति पैसिव निवेश को मजबूत बना रही है। उनका कहना है कि सही तरीके से सोना और चांदी को पोर्टफोलियो में शामिल करने से निवेशकों को बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न मिल सकता है। देवांशु सिंगला को दिए ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने पैसिव निवेश के भविष्य, रिटायरमेंट प्लानिंग में इसकी भूमिका, मिडकैप-स्मॉलकैप की संभावनाएं और कीमती धातुओं में निवेश के फायदे पर विस्तार से चर्चा की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश—

भारत में पैसिव निवेश अब शुरुआती चरण से निकलकर मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है। निवेशक अब कम खर्च, पारदर्शिता और इंडेक्स आधारित रिटर्न की स्पष्टता को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इक्विटी, फैक्टर इन्वेस्टिंग और कमोडिटी से जुड़े कई विकल्प उपलब्ध होने के कारण पैसिव फंड पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। अगले एक-दो साल में खुदरा एसआईपी और संस्थागत निवेश के चलते इसमें स्थिर और संरचनात्मक बढ़त देखने को मिल सकती है।

क्या 2026 पैसिव निवेश के लिए बेहतर साल रहेगा या एक्टिव फंड मैनेजमेंट आगे रहेगा?
दोनों ही निवेश शैलियों की अपनी अहमियत है, लेकिन पैसिव निवेश लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। इसमें निवेशकों को रणनीति और जोखिम को लेकर स्पष्टता मिलती है। 2026 में व्यापक बाजार, फैक्टर और एसेट एलोकेशन आधारित इंडेक्स स्कीमों की लोकप्रियता बढ़ने की पूरी संभावना है।

बिल्कुल। पैसिव फंड्स में एसआईपी के जरिए निवेश में अच्छी तेजी आई है। अब निवेशक इंडेक्स फंड्स को शॉर्ट टर्म रणनीति की बजाय लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के साधन के रूप में देख रहे हैं। नियम-आधारित निवेश को लेकर बढ़ती समझ और भरोसा इस बदलाव की बड़ी वजह है। आगे भी एसआईपी पैसिव निवेश की ग्रोथ का प्रमुख आधार बना रहेगा।

पोर्टफोलियो में सोना और चांदी शामिल करने के क्या फायदे हैं? 70:30 का अनुपात क्यों बेहतर माना जाता है?
सोना बाजार में स्थिरता देता है और वैश्विक अनिश्चितता के समय सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। वहीं चांदी का औद्योगिक उपयोग अधिक है, जिससे यह आर्थिक तेजी के दौर में बेहतर ग्रोथ दिखाती है। दोनों धातुएं मिलकर कीमती धातुओं का संतुलित पोर्टफोलियो बनाती हैं। 70:30 का अनुपात सोने की कम उतार-चढ़ाव वाली प्रकृति और चांदी की तेज़ी दोनों का फायदा देता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, यह संयोजन अकेले किसी एक धातु की तुलना में बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न देता रहा है।

सरल और विविध निवेश से शुरुआत करें। निफ्टी 500 जैसे व्यापक बाजार सूचकांक पहले दिन से ही संतुलित एक्सपोजर देते हैं। इसके साथ मोमेंटम या क्वालिटी जैसे फैक्टर इंडेक्स में सीमित निवेश पोर्टफोलियो को और मजबूत बना सकता है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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