ग्रेटर नोएडा में पुलिस ने साइबर ठगी के एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अधूरे या गलत पते वाले आधार कार्ड का इस्तेमाल करके बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ठगी की रकम जमा कराई जाती थी।
जांच के दौरान इन बैंक खातों से एक करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन का पता चला है। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इन खातों से जुड़ी 30 से अधिक शिकायतें भी सामने आई हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हाथरस जिले के सासनी निवासी प्रेम, आतिश और कुणाल के रूप में हुई है। तीनों की उम्र 19 से 21 साल के बीच बताई गई है। पुलिस ने उन्हें लालकुआं इलाके में इंडिया टावर के पास एक निर्माणाधीन इमारत से पकड़ा। उस समय वे बैंक खातों में आए पैसों का हिसाब कर रहे थे।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों और पहचान पत्रों की मदद से बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से मिले पैसे जमा करने के लिए किया जाता था। बाद में रकम निकालकर गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी।
पुलिस के अनुसार, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले युवकों को ठगी की रकम का 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। बाकी 80 प्रतिशत रकम गिरोह के कथित मुख्य आरोपी अरुण और नावेद आपस में बांट लेते थे।
जांच में सामने आया कि जब किसी बैंक खाते पर रोक लग जाती थी या वह बंद हो जाता था, तो आरोपी उससे जुड़े मोबाइल फोन और सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे।
गिरोह पर निवेश में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर, डराकर, ब्लैकमेल करके और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों को ठगने के आरोप हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 29 बैंक पासबुक, 23 चेकबुक, दो डेबिट कार्ड, 14 आधार कार्ड, आठ पैन कार्ड, आठ सिम कार्ड, तीन मोबाइल फोन और 530 रुपये नकद बरामद किए हैं।
फिलहाल पुलिस कथित मुख्य आरोपियों अरुण और नावेद समेत गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। मामले की जांच जारी है।

