जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी) सोमप्रभा ने नौकरी दिलाने के बहाने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और लंबे समय तक ब्लैकमेल करने के मामले में दो प्रॉपर्टी डीलर—राजीव गुप्ता और प्रदीप मित्तल—को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही राजीव गुप्ता पर 2.95 लाख रुपये और प्रदीप मित्तल पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता को दिए जाने के आदेश भी दिए गए हैं।
अदालत के अनुसार, आरोपियों ने लगभग चार वर्षों तक पीड़िता का यौन शोषण किया। कोरोना काल में आवाजाही बंद होने पर भी उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए पीड़िता को प्रताड़ित करना जारी रखा। पति के हाथ मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो लगने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पति के सहयोग और हौसले के बाद पीड़िता ने पुलिस और न्यायालय का रुख किया।
मामला वर्ष 2017 का है, जब नई दिल्ली निवासी पीड़िता नोएडा के फेज-तीन थाना क्षेत्र में नौकरी की तलाश में गई थी। एक सहेली के जरिए उसे सेक्टर-64 स्थित एक कार्यालय में नौकरी की जानकारी मिली। इंटरव्यू के बाद उसी इमारत में मौजूद प्रॉपर्टी डीलर राजीव गुप्ता ने अपने कार्यालय में नौकरी होने का दावा कर पीड़िता का बायोडाटा लिया। अगले दिन उसने 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी पर बुलाया। पीड़िता सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रिकॉर्ड मेंटेनेंस का काम करने लगी। कार्यालय में उसके अलावा एक सुरक्षाकर्मी भी रहता था।
करीब 15 दिन बाद कार्यालय आने वाले लोगों के व्यवहार से असहज होकर पीड़िता ने नौकरी छोड़ने और हिसाब करने की बात कही। अगले दिन बुलाकर राजीव ने पहले उसे घुमाया, फिर खाना खिलाया। खाने के बाद सिरदर्द की शिकायत पर उसे दूसरे कमरे में आराम करने को कहा गया, जहां वह बेहोश हो गई। होश में आने पर उसने खुद को निर्वस्त्र पाया; कमरे में राजीव और प्रदीप शराब पी रहे थे।
पीड़िता ने विरोध कर पुलिस में शिकायत की बात कही तो आरोपियों ने मारपीट की और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे चुप करा दिया। शादी के बाद भी शोषण और ब्लैकमेल का सिलसिला चलता रहा। 2020 में लॉकडाउन के दौरान भी वीडियो कॉल के जरिए धमकियां दी जाती रहीं, अश्लीलता के लिए मजबूर किया गया और आपत्तिजनक वीडियो भेजे गए।
पीड़िता ने अदालत के माध्यम से मामला दर्ज कराने की कोशिश की। जैतपुर थाने में दी गई शिकायत को नोएडा के फेज-तीन थाने भेजा गया, जहां वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट सहित साक्ष्यों के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की।
सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में राजीव गुप्ता को 28 माह और प्रदीप मित्तल को 16 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पीड़िता ने बताया कि शादी के बाद उसने कॉल उठाना बंद कर दिया तो पुराने वीडियो उसके पति को भेजने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता रहा। इस दौरान उसके पिता की तबीयत बिगड़ी और गांव जाने के बाद भी धमकियां जारी रहीं। पिता के निधन के बाद भी उत्पीड़न नहीं रुका, जिसके बाद उसने न्याय के लिए अंतिम रूप से कदम उठाया।