बारिश के दिनों में शहर में जलभराव की गंभीर समस्या रहती है और बीते मानसून सीजन में सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। ऐसे में सरकार बरसाती पानी निकासी के लिए नजफगढ़ ड्रेन के साथ अन्य विकल्पों को देखा जा रहा है। प्रदेश सरकार शहर के बरसाती पानी को दो चैनलों में बांटना चाहती है। इसके लिए गुरुग्राम-नूंह-पलवल तक नई ड्रेन निर्माण की योजना है। इसे सिरे चढ़ाने के लिए कई बैठकें हो चुकी हैं और अब इसका पूरा खाका तैयार कराने की योजना है। इसके लिए जीएमडीए कंसल्टेंट रखने जा रहा है। योजना के अनुसार गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन शहर से नूंह और पलवल और यूपी से होते हुए यमुना नदी तक पानी पहुंचाना है। इससे संबंधित कार्यों के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए सर्वे, अध्ययन और जांच करने हेतु कंसल्टेंसी फर्म रखने की तैयारी है। इसके बाद निर्माण को लेकर कदम उठाया जाएगा।
योजना के अनुसार न्यू गुरुग्राम के पानी डायवर्ट कर गुरुग्राम-नूंह-पलवल ड्रेन में भेजा जाना है। अधिकारियों के अनुसार भोंडसी तक पानी का प्राकृतिक प्रवाह नहीं है, ऐसे में नई ड्रेन में पानी को पंप कर भोंडसी तक पहुंचाना होगा। इसके बाद पानी का सोहना और नूंह की ओर से नेचुरल ढलान है। एसपीआर के साथ बन रही नई ड्रेन से गुरुग्राम-नूंह-पलवल ड्रेन से जोड़ा जाएगा। बता दें कि केंद्रीय विद्युत व आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर यह कदम उठाया जा रहा है। यह ड्रेन गुरुग्राम से सोहना, नूंह जिला होते हुए पलवल तक जाएगी। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि गुरुग्राम-सोहना-नूंह-पलवल ड्रेन के लिए कंसल्टेंट रखा जाना है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया और 15 जनवरी के बाद खोला जाएगा। नई ड्रेन बनने से शहर के पानी को दो भागों में बांटा जा सकेगा।
जलभराव को लेकर कई बिंदुओं पर हो रहा काम
जीएमडीए तालाबों, वाटर बॉडीज, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बेल्ट पर काम करने जा रहा है। इसके बड़ी सोसाइटियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को ठीक करने के लिए समय सीमा तय कर दिया है। इसके अलावा बारिश के पानी को तालाबों को ठीक करना है। जीएमडीए का मानना है कि तालाबों को ठीक करा दिया जाए तो काफी मात्रा में बारिश के पानी का संचय किया जा सकता है। शहर में अधिकांश सड़कों के ग्रीन बेल्ट का स्तर सड़क से ऊपर है। ग्रीन बेल्ट की मिट्टी को निकालकर सड़क के स्तर से नीचा किया जाना है।
अभी शहर का बरसाती पानी लेन-1, लेग-2 और लेग-3 से होकर नजफगढ़ में जाना है। इसके बाद नजफगढ़ ड्रेन से पानी यमुना नदी में चला जाता है। पानी निकासी नहीं होने से शहर के कई भागों में जलभराव होता है। दूसरा मानसून के सीजर में यमुना में जल स्तर बढ़ाने से पानी की निकासी में दिक्कतें आती हैं।

