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फरीदाबाद: स्वास्थ्य व्यवस्था का होगा एक्सरे

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अब अनुमान और कागजी प्रस्तावों के बजाय जमीनी हकीकत पर आधारित होगी। अब जीआईएस मैपिंग के जरिए जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का डिजिटल खाका तैयार किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस इलाके में कितनी आबादी है और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उस अनुपात में पर्याप्त हैं या नहीं। आगामी बजट में इसी विश्लेषण के आधार पर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की योजना है।

फरीदाबाद जिले की आबादी करीब 18 से 20 लाख के बीच मानी जाती है। इस बड़ी आबादी के लिए जिले में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 200 से अधिक अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान सक्रिय हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र के हैं। सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में जिला अस्पताल, उपमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और उप-केंद्र शामिल हैं। जिले में करीब 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और दर्जनों प्राथमिक व उप-स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिन पर ग्रामीण आबादी की निर्भरता सबसे ज्यादा है। इसके बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों, बेड और आधुनिक मशीनों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है।

आबादी बनाम सुविधाएं, बढ़ता दबाव
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में प्रति एक हजार आबादी पर अस्पताल के बेड की संख्या राष्ट्रीय मानकों से कम है। इसका सीधा असर यह है कि जिला अस्पताल और सरकारी सीएचसी पर ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है। शहरी क्षेत्रों जैसे एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद में निजी अस्पतालों की संख्या अधिक है लेकिन सरकारी अस्पतालों पर निर्भर आबादी भी कम नहीं है। वहीं तिगांव, छांयसा, मोहना, दयालपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक-एक स्वास्थ्य केंद्र पर कई गांवों की जिम्मेदारी है, जिससे प्रति केंद्र आबादी का बोझ काफी अधिक हो जाता है।

कम सुविधाओं वाले इलाके होंगे चिन्हित
जीआईएस मैपिंग के जरिए पहली बार यह स्पष्ट होगा कि जिले के किन इलाकों में अस्पताल या पीएचसी तक पहुंचने के लिए लोगों को 10 से 15 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीण और शहरी सीमांत क्षेत्रों में ट्रॉमा केयर, एंबुलेंस और विशेषज्ञ उपचार की क्या स्थिति है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण फरीदाबाद में सड़क दुर्घटनाएं, सांस संबंधी बीमारियां और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं आम हैं लेकिन इनके अनुपात में ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी सुविधाएं काफी सीमित हैं।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )