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कैसे बीजेपी ने बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान बांग्लादेश कार्ड खेला

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May 6, 2026 #source
How the BJP played the Bangladesh card during the Bengal poll campaign

बंगाल चुनाव में बांग्लादेश मुद्दे का राजनीतिक प्रभाव

पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव को केवल एक चुनाव के रूप में नहीं देखा जाएगा, बल्कि यह वह क्षण भी होगा जब लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने चुनावी रणनीति में एक नया आयाम पाया और बांग्लादेश राज्य की आंतरिक राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

निर्णायक परिणाम सामने आ चुके हैं। भारतीय चुनाव आयोग के 294 में से 293 सीटों के परिणाम के अनुसार, भाजपा ने 207 सीटें जीतीं जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटें मिलीं। फाल्टा क्षेत्र में पुनः मतदान का आदेश दिया गया है, इसलिए उसका परिणाम अभी बाधित है।

इस विशाल विजय को केवल एक कारण से समझाना संभव नहीं है। तृणमूल कांग्रेस को ना केवल जनाक्रोश का सामना करना पड़ा बल्कि उसके नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे।

इसके अतिरिक्त, भाजपा के पास एक मजबूत संगठनात्मक मशीनरी थी जिसने काम को बेहतर ढंग से अंजाम दिया।

इन सब कारणों को एक संगठित विचारधारा में बदलने का काम बांग्लादेश के मुद्दे ने किया। इसने असंतोष को एक सभ्य सुरक्षा की भावना में परिवर्तित कर दिया।

बांग्लादेश एक ऐसा दर्पण साबित हुआ जिसमें पश्चिम बंगाल को स्वयं को देखने के लिए मजबूर किया गया: हिन्दू या मुस्लिम, शरणार्थी या घुसपैठिया, सीमा क्षेत्र या राष्ट्र, बंगाली या देशद्रोही। यही भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। उसने बांग्लादेश को वह भाषा बना दिया जिससे नागरिकता, जनसांख्यिकी, कल्याण और निष्ठा को परखा गया।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)