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यदि मुझे दूसरी ज़िंदगी मिलती, तो मैं अधिक समय अनुवाद में बिताता : कवि अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा अपने 80वें जन्मदिन पर

‘Had I another life, I’d spend more time translating’: Poet Arvind Krishna Mehrotra on turning 80

अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा : अनुवाद के प्रति एक समर्पित जीवन

भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य के एक महत्वपूर्ण कवि और अनुवादक अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा आगामी 80 वर्ष के हो रहे हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा और अनुवाद के प्रति उनका दृष्टिकोण साहित्य जगत के लिए प्रेरणास्रोत है। एक लंबे एवं समर्पित सफर के बाद भी उनका कहना है कि यदि उन्हें एक और जीवन मिलता, तो वे अनुवाद को और अधिक समय देते।

मेहरोत्रा का साहित्यिक योगदान व्यापक है। उनकी कविताएँ, अनुवाद, और साहित्यिक समीक्षाएं भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य को समृद्ध करने में अहम भूमिका निभाती हैं। उनके कार्यों में भारतीय संस्कृति और भाषा की विविधता की झलक मिलती है। उनका अनुवाद कार्य भी इतना प्रभावशाली है कि उन्होंने विदेशी पाठकों के लिए भारतीय साहित्य के दरवाज़े खोले हैं।

देहरादून में उनका आवास एक शांतिपूर्ण स्थल है जहाँ साहित्यिक विचारों का आदान-प्रदान होता रहता है। यहां आने वाले अनेक साहित्यकार और छात्र उनकी व्यक्तिगत जीवन शैली और साहित्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से प्रेरित होते हैं। निर्देशक और लेखक, विनीत गिल ने अपने लेख में मेहरोत्रा के व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक सफर की झलक प्रस्तुत की है।

विनीत गिल बताते हैं कि मेहरोत्रा की लेखनी और उनकी सार्वजनिक छवि में एक अंतर होता है। वे एक कवि होने के साथ-साथ एक संकोची और विचारशील व्यक्ति भी हैं, जो अपने काम में गहराई एवं निष्ठा दिखाते हैं।

मेहरोत्रा ने भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य के कई विद्वानों और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। वे कहते हैं कि उनका उद्देश्य केवल कविता रचना नहीं, बल्कि उस कविता की सार्वभौमिकता और समझ को बढ़ाना भी है, जिसे वे अनुवाद के माध्यम से साकार कर पाते हैं।

उनके अनुभव और समर्पण से स्पष्ट होता है कि साहित्य में उनका योगदान सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य के वैश्विक विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी 80वीं वर्षगांठ पर साहित्य जगत उन्हें सम्मानित करता है और उनके आने वाले कार्यों की प्रतीक्षा करता है।

विनीत गिल एक अनुभवी लेखक हैं जिन्होंने अपनी किताब में लिखा है, “हम वर्षों से किसी लेखक को पढ़ते हैं और अचानक हम उस लेखक से आमना-सामना करते हैं। तब हमें क्या अनुभव होता है? अत्यधिक परिचय या आश्चर्य कि ‘लेखक’ और ‘व्यक्ति’ में कितना अंतर होता है?” यही अनुभव मैंने भी अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा के साथ महसूस किया।

मेहरोत्रा की किताबें जैसे A Concise History of Indian Literature in English, The Oxford India Anthology of Twelve Modern Indian Poets, Partial Recall, The Songs of Kabir, और Translating the Indian Past ने भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य को एक नई दिशा दी है। मेहरोत्रा का व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक कार्य आज भी गंभीर अध्ययन और प्रशंसा के विषय हैं।

एक संकोची लेखक

देहरादून में मेहरोत्रा के घर के बाहर खड़े होकर, विनीत गिल के शब्द मेरे मन में गूँज रहे थे। मुझे लगा कि कुछ खास होने वाला है। यह संभावना साहित्य के साथ उनके संबंध की गहराई को दर्शाती है।

अंततः अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा की कहानी भारतीय साहित्य के लिए एक प्रेरणा है। उनकी जिंदगी और लेखनी हमें सिखाती है कि कैसे समर्पण और गहराई से किए गए साहित्यिक प्रयासों से विश्व साहित्य में अमिट प्रभाव बनाया जा सकता है।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)