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आने वाले दिनों में रेल चलाने की जिम्मेदारी प्राइवेट हाथों में सौंपी जा सकती है

पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने रेलवे को अपनी परियोजनाओं में निजी कंपनियों को कहा है। मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ ट्रेन, वैगन और लोकोमोटिव की खरीद के लिए भी प्राइवेट कंपनियों के साथ वेट लीज, हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जैसे तरीकों को अपनाया जाए।

आने वाले दिनों में रेल चलाने की जिम्मेदारी प्राइवेट हाथों में सौंपी जा सकती है। सार्वजनिक परियोजनाओं को मंजूरी देने वाली एक अहम सरकारी समिति ने रेलवे को कई मोर्चों पर निजी कंपनियों की मदद लेने की सलाह दी है। यह सलाह ट्रैक बिछाने से लेकर पोर्ट तक कनेक्टिविटी सुधारने और ट्रेन, वैगन और लोकोमोटिव (इंजन) खरीदने जैसे कामों के लिए है। हालांकि मोदी सरकार अपने पिछले दो कार्यकाल से ही रेलवे में निजी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रेलवे खुद इस तरह के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) से बचता रहा है।

लेकिन अब एक्सपेंडीचर सेक्रेटरी की अगुवाई वाले पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने रेलवे की परियोजनाओं में निजी कंपनियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। समिति ने सुझाव दिया है कि सरकारी बजट से मिलने वाली मदद का इस्तेमाल करके मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स में निजी कंपनियों को जोड़ा जाए। PIB ने यह भी कहा है कि ट्रेन, वैगन और लोकोमोटिव (रोलिंग स्टॉक) की खरीद के लिए भी प्राइवेट कंपनियों के साथ ‘वेट लीज’, ‘हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल’ (HAM) और PPP जैसे तरीकों को अपनाया जाए।

कौन हैं बेहतर विकल्प?

‘वेट लीज’ का मतलब है कि एक नई लीजिंग कंपनी रोलिंग स्टॉक के साथ-साथ उन्हें चलाने वाले क्रू को भी लीज पर देगी। वहीं, HAM मॉडल में सरकार प्रोजेक्ट बनाने के दौरान 60% लागत निजी कंपनियों को देती है और बाकी 40% लागत किस्तों में दी जाती है। PIB ने सुझाव दिया है कि रेलवे को नीति आयोग से सलाह लेनी चाहिए और आर्थिक मामलों के विभाग के साथ मिलकर ‘मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट’ तैयार करना चाहिए।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )