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UP-बाँदा में हिट एंड रन के कानून के विरोध में ट्रक चालकों ने किया चक्का जाम, रोडवेज चालकों ने किया कार्य बहिष्कार

यूपी के बाँदा में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार ने हिट एंड रन के कानून में बदलाव किया है। जिसके बाद से पूरे देश में ट्रक और बसों के ड्राइवरों ने हड़ताल और प्रदर्शन शुरू कर दिया है इसी कड़ी में बांदा के मवई बाईपास में ट्रक ड्राइवरों ने चक्का जाम कर दिया वहीं रोड वेज बस चालकों ने भी कार्य बहिष्कार कर दिया। दर असल इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर पहले दो साल की सजा थी लेकिन अब ड्राइवर अगर हादसे के बाद घायल को अस्पताल नहीं पहुंचाएंगे साथ ही अस्पताल और मजिस्ट्रेट को सूचना नहीं देंगे और मौके से भाग जाएंगे तो दोषी पाए जाने पर 10 साल की सजा और सात लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा।

आपको बता दे की कानून में संशोधन की सूचना ड्राइवरों को जैसे ही लगी वह अक्रोशित हो गए और शहर कोतवाली अंतर्गत मवई बाईपास में ट्रक ड्राइवरों ने चक्का जाम कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया ड्राइवरों का कहना है की अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो वह ड्राइवरी छोड़ देंगे और प्रदर्शन करते रहें इतना ही नहीं इसी सड़क पर जान दे देंगे उनका कहना की अगर वह हादसे के बाद रुके तो भीड़ उन्हे जिंदा नहीं छोड़ेगी इसलिए उन्हें मौके से भागना ही पड़ता है ऐसे में उन्हें दोषी करार किया ही जाता है उनके पास इतना पैसा नहीं होता की वह जुर्बाने की रकम भर पाएं और 10 साल की कैद में चले जाएंगे तो उनके परिवार वाले भूखे ही दम तोड़ देंगे।वहीं इस कानून के विरोध में रोडवेज बस चालकों ने भी कार्य का बहिष्कार कर दिया कहा यह काला कानून है इसके तहत वह ड्राइवर की नौकरी नहीं कर सकते अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो वह नौकरी छोड़ देंगे और कभी बस नहीं चलाएंगे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}