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UP-अयोध्या में एक्सीडेंट नए कानून को लेकर सड़को पर उतरे रोडवेज चालक, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

खबर अयोध्या से हैं दुर्घटना के नए कानून को लेकर रामनगरी अयोध्या में भी ड्राइवरो ने चक्का जाम कर दिया, बस स्टॉप पर रोडवेज बसों के ड्राइवर ने चक्का जाम कर दिया तो हाईवे पर ट्रक चालकों ने हाइवे जाम कर दिया, ड्राइवरो के स्ट्राइक से यात्रियों को परेशानी हुई और वह दर-दर भटकते नजर आए, दरअसल दुर्घटना के नए कानून से ट्रक ड्राइवर समेत अन्य वाहनों को ड्राइवर भी हड़ताल पर हैं ड्राइवरो का मानना है की दुर्घटना जानबूझकर नही होती है

इसके लिए 7 वर्ष का कारावास और 10 लाख रुपए का जुर्माना उन्हें मंजूर नहीं है, जो पहले से कानून चल रहा वही लागू हो नहीं तो वह ड्राइवर की नौकरी छोड़कर कोई अन्य काम करेंगे, आज सुबह होते ही बस स्टॉप पर ड्राइवर ने बस को खड़ा कर दिया तो वही हाईवे पर ट्रक ड्राइवर ने ट्रक खड़ा कर हाईवे को जाम कर दिया, सूचना मिलने पर जिला प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और उन्हें मनाने की कोशिश की गई, आरएम रोडवेज विमल राजन ने कहा कि परिवहन निगम के ड्राइवर को कुछ गलतफहमी हुई है किसी भी स्ट्राइक का आह्वान नहीं हुआ था, उनसे अपील की जा रही है कि सभी यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएं ताकि सभी यात्री सुरक्षित अपने घरों तक पहुंचे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}