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शिक्षा में एआई और वर्चुअल प्रयोगशालाओं का समावेश

ByAnkshree

Dec 23, 2025
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लगातार और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ वर्ष 2025 भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अहम पड़ाव बनकर उभरा। यह वह साल रहा जब कई सुधार सिर्फ नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कक्षाओं, कॉलेज परिसरों और डिजिटल मंचों पर साफ दिखाई देने लगे। अंतर्विषयी पढ़ाई, शोध पर बढ़ता जोर, डिजिटल ढांचे का विस्तार और उद्योग के साथ मजबूत होते सहयोग ने शिक्षा को पहले से ज्यादा लचीला, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों और नियामकीय बदलावों के जरिए शिक्षा तक पहुंच बेहतर हुई, पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरी और सीखने के नतीजों में भी ठोस सुधार दिखा। अब जब 2026 की ओर बढ़ते हुए शिक्षा व्यवस्था बहुविषयी, तकनीक-आधारित और अनुभव से सीखने वाले मॉडल की तरफ बढ़ रही है, तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने सुधार हुए, बल्कि यह है कि क्या ये बदलाव हर छात्र तक पहुंच पाएंगे और क्या शिक्षा वास्तव में उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर पाएगी।
वर्ष 2025 की एक प्रमुख विशेषता शिक्षण में तकनीक का बढ़ता समावेश रहा, जिसमें एआई-सक्षम कक्षाएं, वर्चुअल प्रयोगशालाएं और हाइब्रिड लर्निंग मॉड्यूल शामिल हैं। इन बदलावों ने न केवल शिक्षा तक पहुंच को बेहतर बनाया, बल्कि देशभर के छात्रों के लिए व्यक्तिगत सीखने के मार्गों को भी सशक्त किया है। वर्ष 2025 का एक अहम पहलू कौशल विकास के लिए अकादमिक जगत और उद्योग के बीच बढ़ता सहयोग रहा। इसने विभिन्न विषयों से स्नातक हो रहे छात्रों के कौशल को वैश्विक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप सफलतापूर्वक समन्वित किया। वर्ष 2026 में शिक्षा का भविष्य बड़े बदलाव की ओर अग्रसर है, जहां बहुविषयी और अंतरविषयी शिक्षा को केंद्र में रखा जाएगा। इंजीनियरिंग, विज्ञान, मानविकी और डिजाइन के क्षेत्र में समेकित शिक्षा छात्रों को भविष्य की अनदेखी चुनौतियों के लिए समग्र समाधान विकसित करने में सक्षम बनाएगी।
विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी बिजनेस स्कूल के प्रिंसिपल डा. संदीप भारद्वाज कहते हैं कि नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क का कार्यान्वयन शिक्षा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इसने सीखने की प्रक्रिया में समानता स्थापित की है, चाहे वह औपचारिक शिक्षा हो या व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण, कक्षा में पढ़ाई हो या ऑनलाइन माध्यम, विज्ञान की पढ़ाई हो या मानविकी की। अब छात्र किसी भी स्ट्रीम से, किसी भी माध्यम के जरिए अपनी पसंद के अनुसार क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं। इससे स्टेम (STEM) को शीर्ष पर और व्यावसायिक कौशल को निचले पायदान पर रखने वाली मानसिकता समाप्त होती है।
डा. भारद्वाज कहते हैं कि शिक्षा में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट विकल्पों ने उन बड़े वर्गों के लिए भी शिक्षा को सुलभ बनाया है, जो पारंपरिक और रैखिक शैक्षणिक मार्ग का अनुसरण करने में असमर्थ थे। उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं पर बढ़ते जोर ने शिक्षा का लोकतंत्रीकरण किया है। भले ही इसकी शुरुआत धीमी रही हो, लेकिन आने वाले समय में इसके तेजी से विस्तार की संभावना है और यह शिक्षा से जुड़ी अभिजात्य प्रवृत्ति को समाप्त करने की क्षमता रखता है। इन सहित अनेक सुधारों ने यह सुनिश्चित किया है कि शिक्षा तक पहुंच बढ़े, गुणवत्ता में सुधार हो और सीखने के ठोस परिणाम सामने आएं।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )