जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आखिरकार तैयार हो चुका है। अब बस एयरोड्रम लाइसेंस और प्रधानमंत्री कार्यालय से उद्घाटन की तारीख मिलने का इंतज़ार है। एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा यह प्रोजेक्ट पूरे 24 साल बाद पूरी तरह आकार ले पाया है।
इन दो दशकों में केंद्र और राज्य की कई सरकारों ने कभी इसे जेवर से हटाकर हिरनगांव, हिसार, झज्जर ले जाने पर विचार किया, तो कभी आगरा और मथुरा में शिफ्ट करने का सुझाव दिया। लेकिन नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास मॉडल के तहत जब इसका शिलान्यास हुआ, तभी से प्रोजेक्ट ने नई दिशा पकड़ी। चार साल बाद, एयरपोर्ट उड़ानों के लिए पूरी तरह तैयार है—अब सिर्फ उद्घाटन की हरी झंडी का इंतजार है।
जेवर में एयरपोर्ट का विचार सबसे पहले 2001 में तब के मुख्यमंत्री और वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर रखा था। बाद में, 2008 में मायावती सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोशिश की और यमुना अथॉरिटी से 5,000 हेक्टेयर जमीन तक रिज़र्व करा दी, लेकिन केंद्र की कांग्रेस सरकार की अनिच्छा के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
2012 में अखिलेश यादव के कार्यकाल में इस योजना को पूरी तरह रोक दिया गया। हालांकि, 2015 में स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा जब केंद्र में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री बने, तब जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट ने दोबारा रफ्तार पकड़ी—और आज अपने अंतिम चरण में खड़ा है।