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कोली समुदाय ने सरकार के निर्णय का किया स्वागत

ऑल इंडिया कोली सोसाइटी, ठाणे जिला इकाई ने कोंकण तट पर पारंपरिक कोलीवाड़ों को आधिकारिक मान्यता देने के राज्य सरकार के फैसले का स्वागत किया है। इस निर्णय में ठाणे पूर्व स्थित चेंदानी कोलीवाड़ा भी शामिल है। समुदाय का मानना है कि कोलीवाड़ों का भौतिक सर्वे और सीमांकन होने से वहां पीढ़ियों से रह रहे कोली परिवारों को अतिक्रमणकारी घोषित करने की कार्रवाई पर रोक लगेगी।

गौरतलब है कि ठाणे ईस्ट के चेंदानी कोलीवाड़ा में स्लम पुनर्विकास, क्लस्टर विकास और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रस्तावित परियोजनाओं का स्थानीय कोली समुदाय ने पहले ही कड़ा विरोध किया था। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में कोलीवाड़ों की सीमाएं तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया है।

चेंदानी कोलीवाड़ा को ठाणे शहर में मूल कोली समुदाय का पारंपरिक ‘गांव थाना’ क्षेत्र माना जाता है। महाराष्ट्र भूमि राजस्व अधिनियम 1966 के तहत बड़े गांव थाने के अधिकार अब स्पष्ट रूप से लागू किए जा सकेंगे। इससे इस क्षेत्र पर स्लम पुनर्विकास योजनाएं थोपने की कोशिशों पर अंकुश लगने की संभावना जताई जा रही है।

ऑल इंडिया कोली सोसाइटी के अध्यक्ष आनंद प्रभाकर कोली ने इस निर्णय के क्रियान्वयन को लेकर ठाणे जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने मांग की है कि सीमांकन प्रक्रिया में स्थानीय सामाजिक संगठनों, पंजीकृत कोली संस्थाओं और पारंपरिक जमात पंचायतों को शामिल किया जाए।

सोसाइटी के क्षेत्रीय सचिव सचिन थानेकर के अनुसार, सीमांकन में पारंपरिक मछली सुखाने के स्थान, नाव और जाल रखने की जगह, सामुदायिक मंदिर, ग्राम देवता स्थल, आंतरिक सड़कें, खुले सामाजिक क्षेत्र और गैर-कृषि भूमि को भी शामिल किया जाना चाहिए।

कोली समुदाय के लिए यह फैसला केवल विकास से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व, अधिकारों और परंपराओं की मान्यता भी है। समुदाय ने सरकार से इस निर्णय को शीघ्र लागू करने की अपेक्षा जताई है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)