लड़की बहिन योजना में 80 लाख गैर-योग्य लाभार्थियों की पहचान, विपक्ष ने वित्तीय संकट की जताई चिंता
महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री माजी लड़की बहिन योजना के तहत लगभग 80 लाख गैर-योग्य महिलाओं की पहचान की है, जो ई-केवाईसी की अंतिम तिथि के बाद सामने आई। यह कदम उस वक्त लिया गया जब विपक्षी दलों ने देवेंद्र फडणवीस नेतृत्व वाली सरकार पर गंभीर वित्तीय संकट होने का आरोप लगाया है।
1 जून सोमवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अप्रैल 30 तक ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर लगभग 1.7 करोड़ रह गई। हालांकि, डिफाल्ट सहायक पात्रता मानदंडों के अनुपालन से जुड़े कारण भी रहे।
सरकार ने लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरा करने के लिए आठ महीने का समय प्रदान किया था। अधिकारी ने बताया, “करीब 50 से 55 लाख महिलाओं ने पूरा प्रक्रिया पूरी नहीं की, जबकि दो से तीन लाख ने इस दौरान त्रुटियों को सुधारा। इसके अतिरिक्त, लगभग 12 लाख महिलाएं ऐसी थीं जो आयकरदाता थीं और जिनकी वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपये से अधिक थी, वहीं 4.5 लाख से अधिक महिलाएं 65 वर्ष की उम्र की ऊपरी सीमा पार कर चुकी थीं।”
इसके साथ ही, लगभग पांच लाख महिलाएं पहले से नमो शेतकरी योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रही थीं।
कई शिकायतों के जवाब में, जिनमें ई-केवाईसी पूरी करने वाली महिलाओं को मासिक किश्तें न मिलने की बात कही गई है, अधिकारी ने कहा कि असल लाभार्थियों की अंतिम संख्या एक सप्ताह में स्पष्ट हो जाएगी और शिकायतों की पार-पुष्टि हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ई-केवाईसी न पूरी करने के कारण 80 लाख महिलाओं को योजना से बाहर नहीं किया गया।
वहीं, विपक्ष के नेता एनसीपी (एसपी) के जयंत पाटिल ने कहा कि योजना से लाभार्थियों को हटाने से राज्य में “गंभीर वित्तीय संकट” का पता चलता है। पाटिल ने आरोप लगाया कि यह योजना, जो पात्र महिलाओं को मासिक 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है, 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनावों में महायुति गठबंधन की खराब प्रदर्शन के बाद लाई गई थी।
पूर्व मंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य सरकार पर बढ़ते वित्तीय दबाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “केन्द्र के बाद अब राज्य भी गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। पहली चोट हमारी ‘लड़की बहिनों’ पर पड़ी है। राज्य का राजकोषीय घाटा बहुत है और वैश्विक आर्थिक मंदी ने स्थिति को और खराब किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर योजना और सावधानीपूर्ण कार्यान्वयन के साथ इस कदम को टाला जा सकता था।
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने भी ऐसे ही आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार धीरे-धीरे लाभार्थियों को योजना से हटाकर इसे समाप्त करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “केवाईसी सिर्फ बहाना है। असली मंशा धीरे-धीरे लाभार्थियों को हटाने और अंततः योजना को बंद करने की है।” उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि अब ये महिलाएं नकली लाभार्थी मानी जा रही हैं, तो क्या चुनावों से पहले उचित केवाईसी वेरिफिकेशन बिना योजना शुरू करना सरकार की ही विफलता नहीं है?
उन्होंने महिलाओं से पैसे वसूलने या उन्हें असुविधा पहुंचाने पर सरकार को कड़ा विरोध का सामना करना पड़ने की चेतावनी भी दी।