Report By: ICN Network
महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव का दर्जा देते हुए इसे और खास बना दिया है। सरकार ने गणेश मंडलों को सुझाव दिया है कि वे इस बार की झांकियों और पंडालों की थीम भारतीय सेना द्वारा हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित रखें।
10 दिन का यह सार्वजनिक गणेशोत्सव 27 अगस्त से शुरू हो रहा है। महाराष्ट्र में यह परंपरा 132 साल पुरानी है। 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने घरों में मनाए जाने वाले इस पर्व को सार्वजनिक रूप देकर इसे सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया था। आजादी के बाद भी गणेशोत्सव समाज में राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का माध्यम बना रहा।
बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति के अध्यक्ष नरेश दहिबावकर ने बताया कि केवल मुंबई और उसके उपनगरों में ही लगभग 12,000 सार्वजनिक पंडाल सजते हैं। इनमें से लालबागचा राजा जैसे बड़े गणेश मंडल भी शामिल हैं, जिनकी संख्या करीब 3200 है।
इस वर्ष राज्य सरकार ने गणेशोत्सव मंडलों के लिए 11 करोड़ रुपये का अनुदान घोषित किया है। इसमें से 1,800 भजन मंडलियों को 25-25 हजार रुपये दिए जाएंगे। हालांकि मंडलों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन को राज्य महोत्सव का दर्जा देने के बावजूद सिर्फ 11 करोड़ रुपये का अनुदान “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसा है। कई मंडलों का मानना है कि सरकार को इस पर फैसला लेने से पहले पुराने और बड़े गणेशोत्सव मंडलों से सलाह करनी चाहिए थी।
दहिबावकर ने कहा कि जिस तरह पश्चिम बंगाल सरकार दुर्गा पूजा समितियों को आर्थिक सहायता देती है, उसी तरह महाराष्ट्र में भी गणेशोत्सव मंडलों को मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये मंडल केवल त्योहार का आयोजन ही नहीं करते, बल्कि बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय भी राहत और मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं।