महाराष्ट्र में विधान सभा में एआई उपयोग के लिए SOP तैयार करने हेतु विशेषज्ञ पैनल का गठन
महाराष्ट्र सरकार ने आगामी 30 दिनों के भीतर एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया है, जो विधायी सभा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का प्रारूप तैयार करेगी। यह पहल गोपनीयता, निगरानी एवं चेहरे की पहचान तकनीक की बढ़ती चिंताओं के बीच की गई है।
विशेषज्ञ पैनल गठन और जिम्मेदारियां
गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधान सभा में एक कटिंग मोशन के जवाब में बताया कि समिति में एआई विशेषज्ञ शामिल होंगे जो शासन एवं सार्वजनिक प्रशासन में एआई तकनीकों के उचित और जिम्मेदार उपयोग के लिए SOP तैयार करेंगे।
समिति की रिपोर्ट और समय सीमा
मंत्री के अनुसार, उक्त समिति चार से छह महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी, जिन्हें बाद में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय एआई नीति एवं कानूनी ढांचे के निर्माण के लिए भेजा जाएगा।
एआई के लाभ और जोखिम
योगेश कदम ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को सरल बनाने, सार्वजनिक सेवा में सुधार, एवं प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की क्षमता रखती है। वहीं उन्होंने इसके दुरुपयोग की आशंका जाहिर करते हुए स्पष्ट निर्देशों एवं सुरक्षा प्रावधानों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
गोपनीयता उल्लंघन से संबंधित मौजूदा कानून
मंत्री ने बताया कि वर्तमान कानूनी प्रावधान ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाई के उपयुक्त साधन उपलब्ध कराते हैं जो एआई-सक्षम उपकरणों, जैसे स्मार्ट ग्लासेज़ का उपयोग कर गुप्त रूप से रिकॉर्डिंग या निजता का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने संवेदनशील सरकारी संस्थानों में तैनात सुरक्षा कर्मियों को इन उपकरणों की पहचान और निवारण हेतु प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की बात कही।
विधायकों की सहमति के बिना फेस रिकग्निशन प्रणाली पर प्रश्न
शिव सेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने विधान भवन परिसर में स्थापित चेहरे की पहचान प्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने इस प्रणाली के कार्यान्वयन के दौरान विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों की सहमति न लेने पर असमंजस जताया। इसके अतिरिक्त, ठाकरे ने डेटा भंडारण स्थान, डेटाबेस प्रबंधन कंपनी, सुरक्षा उपायों तथा परियोजना के संबंध में विस्तृत जानकारी जारी करने की मांग की।
गोपनीयता से जुड़ी व्यापक चिंताएं
कांग्रेस विधायक अस्लम शेख ने सवाल किया कि विधायकों की आँख की परत (आयरिस) या अन्य बायोमेट्रिक पंजीकरण Legislature में क्यों नहीं हुआ जबकि चेहरे की पहचान डेटाबेस क्यों तैयार किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल तस्वीरों से चेहरा पहचान प्रोफाइल बनाना न केवल विधायकों के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी गंभीर सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न करता है।
शासक दल के विधायकों का समर्थन
भाजपा विधायक सिद्धार्थ शिरोळे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चेतन तुपे और भाजपा की नमिता मुंडाडा सहित कई शासक गठबंधन सदस्य महाराष्ट्र में एआई उपयोग के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा बनाने का समर्थन कर रहे हैं।
विधायक सचिवालय की जिम्मेदारी
कदम ने स्पष्ट किया कि विधान सचिवालय स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में कार्य करता है न कि राज्य सरकार के अधिकार में। उन्होंने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम विधान सचिवालय के पास उपलब्ध तस्वीरों से बनाया गया प्रतीत होता है। स्पीकर द्वारा जांच के आदेश पर पुलिस जांच करेगी।
केंद्र सरकार द्वारा एआई कानून की तैयारी
मुंबई में योगेश कदम ने दोहराया कि जबकि महाराष्ट्र अपनी विशेषज्ञ समिति के माध्यम से SOP तैयार करेगा, किंतु पूर्ण कानूनी ढांचा केंद्र सरकार की ओर से लाया जाएगा। राज्य के SOP एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए दिशानिर्देश प्रदान करेंगे एवं राष्ट्रीय नीति निर्माण में योगदान देंगे।