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मराठा आरक्षण समस्या तेज़ हुई, मनोज जरांगे-पाटिल ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की

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Jun 1, 2026 #source
Maratha Reservation Issue Escalates as Manoj Jarange-Patil Launches Indefinite Hunger Strike

मराठा आरक्षण आंदोलन: अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर गया है, जब जलना जिले के अंतरवली सराटी गांव में सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। यह विरोध राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए किया गया है ताकि लंबित मांगों को पूरा किया जा सके, जिनमें आरक्षण लाभ, कुंबी प्रमाणपत्र, और जाति वैधता दस्तावेज शामिल हैं।

भूख हड़ताल शुरू होते ही राज्य जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विके-पाटिल ने आंदोलन स्थल का दौरा किया और मनोज जरांगे-पाटिल से बातचीत की। इस दौरान सरकार की ओर से कार्यकर्ता की 14-मदों की मांगों पर एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया गया। हालांकि, इसे अंतिम समाधान के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि जरांगे-पाटिल ने कहा कि प्रस्ताव पर विचार तो किया जा सकता है, लेकिन सरकारी अधिकारियों को सीधे आदेश जारी किए जाने चाहिए ताकि मांगों का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में कई आश्वासन दिए गए थे, जो क्रियान्वित नहीं हुए।

जरांगे-पाटिल की प्रमुख मांगों में हयदराबाद गजेटियर 1909 और सतारा गजेटियर को लागू करना शामिल है। मराठा समुदाय के लिए ये दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इनसे कुंबी प्रमाणपत्र जारी करना संभव हो सकेगा, जिससे योग्य मराठाओं को ओबीसी वर्ग के तहत आरक्षण लाभ मिलने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही मराठा कल्याण के लिए ओबीसी कल्याण विभाग जैसे एक अलग मंत्रालय की स्थापना की भी मांग की गई है।

सरकार के मसौदा उत्तर के अनुसार, लगभग 58 मिलियन कुंबी रिकॉर्ड जिला प्रशासन की वेबसाइटों पर पहले ही अपलोड किए जा चुके हैं। जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की गई हैं। जिला अधिकारी आने वाले महीनों में सर्वेक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि वर्तमान सरकार ने मराठा समुदाय के लिए संवैधानिक और न्यायालयीय निर्देशों के भीतर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे भी समुदाय के हित में निर्णय लिए जाते रहेंगे।

यह आंदोलन कई मराठा संगठनों और नेताओं से समर्थन हासिल कर चुका है, जिसमें कोल्हापुर में विरोध प्रदर्शन भी शामिल हैं। वहीं, ओबीसी समूहों ने अपनी चिंताएं भी जताई हैं, जो इस बात से आशंकित हैं कि इस प्रकार के कदम उनके आरक्षण अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। ओबीसी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें संविधानिक संरक्षण में कोई समझौता दिखा तो वे राज्यव्यापी आंदोलन का रास्ता चुन सकते हैं।

भूख हड़ताल जारी है और आरक्षण से जुड़ी विभिन्न हितों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण यह मुद्दा फिर से महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केन्द्र में आ गया है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)