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महाकुंभ में खतरे में Monalisa, ट्रैप में फंसी! फिल्म प्रोड्यूसर ने हीरोइन बनाने के नाम पर ले गए डायरेक्टर का काला चिट्ठा खोला

Report By : ICN Network

महाकुंभ की मोनालिसा: खूबसूरत आंखों से वायरल हुई लड़की मुश्किल में!

महाकुंभ में अपनी खूबसूरत आंखों से मशहूर हुई मोनालिसा अब संकट में फंस गई हैं। फिल्म प्रोड्यूसर जितेंद्र नारायण सिंह उर्फ वसीम रिजवी ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में दावा किया है कि डायरेक्टर सनोज मिश्रा की अब तक एक भी फिल्म रिलीज नहीं हुई है।

इंदौर: ‘महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा ट्रैप में फंस गई हैं।

फिल्म प्रोड्यूसर जितेंद्र नारायण सिंह उर्फ वसीम रिजवी ने एक इंटरव्यू में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे मोनालिसा और उनके परिवार के लिए बेहद अफसोस हो रहा है। ये सीधे-साधे लोग थे। हमने भी कुंभ में उनकी वायरल तस्वीरें देखी थीं, लेकिन सनोज मिश्रा जैसा डायरेक्टर उनके घर पहुंच गया, और परिवार ने बिना जांच-पड़ताल किए अपनी बेटी को उसके हवाले कर दिया।
रिजवी का दावा है कि सनोज मिश्रा की अब तक कोई भी फिल्म रिलीज नहीं हुई है।

कौन हैं जितेंद्र नारायण सिंह उर्फ वसीम रिजवी

जितेंद्र नारायण सिंह उर्फ वसीम रिजवी एक फिल्म प्रोड्यूसर हैं। वह मोनालिसा को साथ ले जाने वाले सनोज मिश्रा के साथ में 3 फ़िल्में बंगाल डायरी, राम की जन्मभूमि और काशी टू कश्मीर बना चुके हैं। हाल ही में वह एक यूट्यूब चैनल पर इंटरव्यू के लिए पहुंचे थे। जहां उन्होंने दावा किया है कि सनोज मिश्रा की कोई भी फिल्म अभी तक रिलीज नहीं हुई है। वह हद से ज्यादा शराब पीता है। यहां तक कि वह फिल्म के सेट पर शराब पीकर आया है। उसने वहां महिला स्टाफ के साथ बद्तमीजी भी की। वसीम रिजवी ने आरोप लगाया कि सनोज मिश्रा को शराब पीने के बाद लड़कियां चाहिए होती हैं। हालांकि नवभारत टाइम्स.कॉम ऐसे किसी दावे की पुष्टि नहीं करता है।

बिना फाइनेंसर के कैसे बनेगी फिल्म?

वसीम रिजवी ने आरोप लगाया कि ‘सनोज मिश्रा के पास न तो फाइनेंसर है। न ही खुद के पास पैसा है, वो फिल्म बना कैसे रहा है। मणिपुर डायरी कभी नहीं बनेगी, ये सिर्फ उस लड़की की मासूमियत का फायदा उठाकर उसको लेकर चारों तरफ घूम रहा है।’ फिल्म प्रोड्यूसर ने दावा किया कि हमने बहुत नुकसान उठाया है। ऐसे कई प्रोड्यूसर हैं, जिसको इसने ठगा है। वह पूरी तरह एक्सपोज हो चुका है।

ट्रैप में फंस चुकी हैं मोनालिसा!

वसीम रिजवी ने कहा कि मोनालिसा के घरवाले अगर डायरेक्टर के बारे में पता करते तो वह अपनी लड़की कभी उसके साथ नहीं भेजते। फिल्म बनाने के लिए पैसे की जरूरत होती है। सनोज मिश्रा पर अब कोई पैसा लगाने को तैयार नहीं है। जिस फिल्म का ऐलान किया है, उस फिल्म की शूटिंग कहां हो रही है? उसका बजट कहां हैं? वह मार्केट से पैसे उधार लेकर भागा हुआ है। उसके ऊपर दो पैसे लगाने वाला भी आज की तारीख में नहीं मिलेगा।

फैंस में बढ़ी चिंता

इस इंटरव्यू के सामने आने के बाद मोनालिसा को लेकर फैंस की चिंता बढ़ गई है। लोग उन्हें वापस लाने की मांग कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “मोनालिसा को बचाकर उसका सपोर्ट करना जरूरी है।” वहीं, दूसरे ने कहा, “भगवान मोनालिसा की रक्षा करें।”
रेखा चौहान नाम की एक यूजर ने टिप्पणी की, “मोनालिसा के माता-पिता को इतनी जल्दी किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए था। जवान बेटी को बिना जांच-पड़ताल के भेजना ठीक नहीं था।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}
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