तीन माह बाद भी 200 से अधिक अतिथि शिक्षकों को सहायक अध्यापक एलटी शिक्षक भर्ती में समायोजित नहीं किया जा सका है। कला, व्यायाम और हिंदी सहित विभिन्न विषयों के इन शिक्षकों को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है।
सहायक अध्यापक एलटी शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से दावा किया गया था कि किसी भी अतिथि शिक्षक को प्रभावित नहीं किया जाएगा। इसके विपरीत प्रदेश के दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्र के स्कूलों में वर्ष-2015 से कार्यरत गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई अतिथि शिक्षक प्रभावित हुए हैं। इन शिक्षकों के मुताबिक स्कूल से हटाए जाने के बाद से उन्हें भारी आर्थिक संकट के साथ ही सामाजिक व मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग में दस साल की सेवा पूरी कर चुके अधिकतर अतिथि शिक्षक नियमित शिक्षक बनने की अधिकतम आयु सीमा भी पार कर चुके हैं। सरकार की ओर से जहां दैनिक और आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिया जा रहा है। उन्हें नियमित किया जा रहा है। वही, अतिथि शिक्षकों के सुरक्षित भविष्य के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई। प्रभावित अतिथि शिक्षकों के मुताबिक, उन्हें अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में समायोजित किया जाना चाहिए।